जिन लोगों ने इस स्वर्ग में परेशानी पैदा की थी, उन्हें नष्ट कर दिया गया है: एलजी

हमारी प्राचीन विरासत हमें शांति, प्रेम तथा मानवता सिखाती है। सभी धर्मों, सभी संप्रदायों के लोग एक परिवार हैं। हमारी संस्कृति, मूल्यों, परंपराओं की निरंतरता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है जो हमारे महान राष्ट्र को फलने-फूलने का अधिकार देती है।इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू कश्मीर की संस्कृति तथा परंपराओं में सूफीवाद के प्रभाव पर प्रकाश डाला।“सभी संप्रदायों, व्यक्तियों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध तथा बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण अस्तित्व के साथ संबंध ही वास्तविक सूफीवाद है। यह जीवन का तरीका है जो लोगों के बीच सांप्रदायिक सदभाव प्रेम और शांति के आदर्शों को बढ़ावा तथा प्रचारित करता है, ”उपराज्यपाल ने कहा।
ऋषियों और सूफियों की भूमि है। यह वह भूमि है जो सभी आध्यात्मिक और धार्मिक धाराओं का सम्मान करती है। उपराज्यपाल ने कहा, जिन लोगों ने इस स्वर्ग में परेशानी पैदा की थी, उन्हें नष्ट कर दिया गया है तथा समाज में शांति और सदभाव स्थापित करने के लिए आतंकवाद तथा अलगाववाद के समर्थकों को निष्प्रभावी कर दिया गया है।उन्होंने कहा, "शांति कायम है, नाइटलाइफ़ लौट आई है और लोग आज़ादी से रह रहे हैं।"उपराज्यपाल ने कहा, आज एक ऐतिहासिक अवसर भी है जब 30 साल से अधिक के अंतराल के बाद श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया।उपराज्यपाल ने इस अवसर की शोभा बढ़ाने और अपने ज्ञान के शब्दों से प्रतिभागियों को आशीर्वाद देने के लिए केरल के माननीय राज्यपाल का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सूफी परंपराओं को बढ़ावा देने के उनके प्रयास के लिए श्रीनगर के क्लस्टर विश्वविद्यालय और जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी को बधाई दी।उन्होंने लोगों से ऋषि-सूफी परंपराओं को अपनाने तथा एकता को मजबूत करने के लिए सांप्रदायिक विभाजन के सभी निशानों को खत्म करने का भी आह्वान किया।श्रीनगर के क्लस्टर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कय्यूम हुसैन ने सम्मेलन का विस्तृत विवरण दिया।
उपराज्यपाल के सलाहकार श्री राजीव राय भटनागर; पद्मश्री डॉ. एसपी वर्मा; विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति; यूटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी; उद्घाटन समारोह में प्रमुख नागरिक, बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।

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