उन्होंने कहा 370 को समाप्त करने के बाद कश्मीर क्षेत्र में 'उम्मीदों की एक नई सुबह' आयी है।

आजादी के बाद भारत की पहली सैन्य जीत के मौके पर यहां शौर्य दिवस समारोह को संबोधित कर रहे सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में लोगों के खिलाफ 'अत्याचार' कर रहा है और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।

सिंह ने कहा, “कश्मीर और लद्दाख आज विकास के त्वरित पथ पर हैं। यह क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, अभी तो हमने सिर्फ उत्तर की ओर यात्रा शुरू की है। हमारी यात्रा तब पूरी होगी जब हम 22 फरवरी 1994 को संसद द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव का पालन करते हुए गिलगित और बाल्टिस्तान जैसे अपने शेष क्षेत्रों में पहुंचेंगे।"
सिंह ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए एक "महायज्ञ" शुरू किया था जो 5 अगस्त 2019 को पूरा हुआ। पीओके में लोगों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा किए गए अत्याचारों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पड़ोसी देश को इसके परिणाम भुगतने होंगे।
“मैं पाकिस्तान से हमारे उन इलाकों में रहने वाले लोगों को दिए गए अधिकारों के बारे में पूछना चाहता हूं जहां उसने अवैध कब्जा बनाए रखा है, हम निर्दोष भारतीयों के खिलाफ किए गए अमानवीय कृत्यों के बारे में सुनते रहते हैं जिसके लिए पाकिस्तान पूरी तरह जिम्मेदार है। पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के नाम पर "मगरमच्छ के आंसू बहाने" का आरोप लगाते हुए, सिंह ने कहा, "पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों का दर्द हमें भी परेशान करता है, न कि केवल उन्हें।"
उन्होंने कहा, "आतंकवाद का 'तांडव' जिसे जम्मू-कश्मीर ने कश्मीरियत के नाम पर देखा है, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है आतंकवादियों का एकमात्र उद्देश्य भारत को निशाना बनाना है। जिसे हम कभी भी पूरा नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, "जब आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग मानवाधिकारों के उल्लंघन का रोना रो रहे थे।"
जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तानी सेना से बचाने के लिए 1947 में श्रीनगर के पुराने हवाई क्षेत्र में पहली सिख रेजिमेंट के आगमन की 75 वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए सेना ने श्रीनगर (बडगाम हवाई क्षेत्र) के पुराने हवाई क्षेत्र में 'शौर्य दिवस' की मेजबानी की।

यह स्वतंत्र भारत का पहला सैन्य अभियान था, एक ऐसा कदम जिसने 1947-48 के युद्ध की दिशा बदल दी थी।
मिशन के लिए भेजे गए भारतीय सेना के सैनिक 27 अक्टूबर, 1947 को इस हवाई क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को जम्मू-कश्मीर से खदेड़ने के लिए उतारा था। कार्यक्रम स्थल पर युद्ध के नायक ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, मेजर सोमनाथ शर्मा और मकबूल शेरवानी के बड़े पोस्टर लगे हुए थे।
ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह की 80 साल की बेटी उषा शर्मा और अन्य शहीदों के परिवार के सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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