भारत के संविधान का अनुच्छेद 311, संघ या राज्य के अधीन नागरिक क्षमताओं में नियोजित व्यक्ति को बर्खास्त करने का प्रावधान करता है। एक अधिकारी के अनुसार, इन कर्मचारियों की गतिविधियां कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के प्रतिकूल नोटिस में आई थीं, वे राज्य की सुरक्षा के हितों के प्रतिकूल गतिविधियों में शामिल पाए गए थे।
समिति ने सरकार के आदेश संख्या 738-जेके (जीएडी) 2020 दिनांक 30.07.2020 के तहत इनपुट, रिकॉर्ड और संज्ञेय सामग्री की जांच के लिए गठित कमेटी ने पाया की -:
1.डॉ. मुहीत अहमद भट, वैज्ञानिक-डी, कंप्यूटर विज्ञान स्नातकोत्तर विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय।
2. श्री माजिद हुसैन कादरी, वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर, प्रबंधन अध्ययन विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय।
3. सैयद अब्दुल मुईद, प्रबंधक, आईटी, जेकेईडीआई।
4. सुश्री असबाह-उल-अर्जमंद खान, जेकेएएस, डीपीओ, प्रचार, ग्रामीण विकास निदेशालय , कश्मीर।
अधिकारी ने कहा कि डॉ. मुहीत अहमद भट को कश्मीर विश्वविद्यालय में अलगाववादी-आतंकवादी एजेंडे के प्रचार-प्रसार में शामिल पाया गया है उनके द्वारा पाकिस्तान द्वारा चलाये जा रहे एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों को कट्टरपंथी की आग झोंका जा रहा था।
कश्मीर विश्वविद्यालय में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर माजिद हुसैन कादरी का लश्कर-ए-तैयबा समेत आतंकी संगठनों से पुराना नाता है। उस पर पहले सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और आतंकवाद से संबंधित विभिन्न मामलों से संबंधित धारा 302, 307, और 427, 7/27 आरपीसी के तहत कई प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सैयद अब्दुल मुईद, प्रबंधक, आईटी, जेकेईडीआई को पंपोर के सेम्पोरा में जेकेईडीआई परिसर पर तीन आतंकवादी हमलों में भूमिका निभाते हुए पाया गया है और संस्थान में उनकी उपस्थिति ने अलगाववादी ताकतों के साथ सहानुभूति बढ़ा दी है।
सुश्री असबाह-उल-अर्जमंद खान को पासपोर्ट मांगने के लिए झूठी सूचना प्रदान करने में शामिल पाया गया है। उसके विदेशी लोगों के साथ संबंध पाए गए हैं जिन्हें आईएसआई के पेरोल पर होने के लिए भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसी द्वारा अनुक्रमित किया गया है। अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए पैसे की खेप लाने में उसकी संलिप्तता भी बताई गई है।


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