हंदवाड़ा-कुपवाड़ा के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में लहराया परचम, 4 कांस्य पदक किए अपने नाम


कश्मीर की सरज़मीन पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहां के नौजवान अगर मेहनत, लगन और सही रहनुमाई के साथ आगे बढ़ें, तो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की पूरी काबिलियत रखते हैं। इसी बात को एक बार फिर साबित करते हुए कुपवाड़ा के खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में शानदार प्रदर्शन किया है। हंदवाड़ा-कुपवाड़ा स्थित खेलो इंडिया वुशू सेंटर के 4 खिलाड़ियों ने चेन्नई में आयोजित 25वीं जूनियर राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल कर पूरे इलाके का नाम रोशन किया है।

यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता 28 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक चेन्नई में आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा और दमखम का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में खेलो इंडिया वुशू सेंटर हंदवाड़ा-कुपवाड़ा की ओर से 6 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 4 खिलाड़ियों ने कांस्य पदक जीतकर अपनी मेहनत और प्रशिक्षण का शानदार नतीजा पेश किया।

पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों में महविश राशिद, ज़ैनब जाविद, उमर रियाज़ और तौहीद शामिल हैं। इन चारों खिलाड़ियों ने कड़े मुकाबलों के बीच अपनी प्रतिभा, हौसले और खेल कौशल का परिचय दिया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती है। खासकर सीमावर्ती जिले कुपवाड़ा के युवाओं के लिए यह कामयाबी नई उम्मीदों और संभावनाओं के दरवाज़े खोलती है।

इन खिलाड़ियों की उपलब्धि केवल 4 कांस्य पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि कश्मीर के दूरदराज़ और सीमावर्ती इलाकों में खेल प्रतिभाओं को सही प्रशिक्षण और अवसर मिलें, तो वे देशभर में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा सकते हैं। खेलो इंडिया वुशू सेंटर हंदवाड़ा-कुपवाड़ा में खिलाड़ियों को मिल रहा प्रशिक्षण इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।

आज के दौर में खेल केवल शारीरिक फिटनेस या मुकाबले जीतने का ज़रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि ये नौजवानों के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतर मुस्तकबिल की बुनियाद भी बन रहे हैं। वुशू जैसे मार्शल आर्ट खेल युवाओं को आत्मरक्षा, संयम, एकाग्रता और मुश्किल हालात में डटे रहने का हुनर सिखाते हैं। ऐसे में कुपवाड़ा के इन खिलाड़ियों की सफलता दूसरे बच्चों और युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक मिसाल है।

इस कामयाबी का एक अहम पहलू यह भी है कि महविश राशिद और ज़ैनब जाविद जैसी युवा महिला खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी उपलब्धि घाटी की उन बेटियों के लिए हौसला बढ़ाने वाली है, जो खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं। उन्हें यह समझने की ज़रूरत है कि मेहनत, आत्मविश्वास और लगातार अभ्यास के दम पर वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

कुपवाड़ा के इन चारों खिलाड़ियों की सफलता पूरे इलाके के लिए खुशी और फख्र का मौका है। अब ज़रूरत है कि ऐसी प्रतिभाओं को लगातार प्रोत्साहन, बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलें। उम्मीद की जानी चाहिए कि इन खिलाड़ियों की यह कामयाबी दूसरे युवाओं को भी खेलों की ओर आकर्षित करेगी और कश्मीर की नई पीढ़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगी।

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