डांगीवाचा के सरकारी स्कूल में लगी आग, भारतीय सेना और फायर सर्विस ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू


कश्मीर के जिला बारामूला के सोपोर इलाके में डांगीवाचा स्थित गवर्नमेंट बॉयज़ मिडिल स्कूल में 4 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। स्कूल की इमारत से आग की लपटें उठती देख आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई। इस मुश्किल घड़ी में भारतीय सेना की 32 राष्ट्रीय राइफल्स (32 RR) और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग के कर्मचारियों ने फौरन मोर्चा संभाला और आग बुझाने के लिए राहत अभियान शुरू कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, आग पर काबू पाने के लिए सेना के जवानों और दमकल विभाग की टीम ने लगातार तीन घंटे से ज्यादा वक्त तक मेहनत की। आग की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य को पूरी मुस्तैदी के साथ अंजाम दिया गया। आखिरकार, शाम करीब चार बजे आग पर काबू पा लिया गया और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

इस अभियान के दौरान दमकल विभाग की गाड़ी में मौजूद पानी खत्म हो जाने के बाद आग बुझाने के काम में मुश्किल पेश आने लगी। मगर जवानों ने हौसला नहीं खोया। भारतीय सेना की तरफ से पानी के टैंकर यानी वॉटर बाउजर उपलब्ध कराए गए, जिनकी मदद से आग बुझाने का काम लगातार जारी रखा गया। सेना और दमकल विभाग के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग के चलते आग को फैलने से रोकने में मदद मिली।

स्कूल जैसी अहम इमारत में आग लगने की घटना ने स्थानीय लोगों को फिक्र में डाल दिया था। सरकारी स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं होता, बल्कि यह इलाके के बच्चों के मुस्तकबिल, उनकी तालीम और उनके सपनों से जुड़ी एक अहम जगह होती है। ऐसे में स्कूल को आग से बचाने के लिए किया गया यह प्रयास स्थानीय आबादी के लिए राहत की बात है।

डांगीवाचा और आसपास के इलाकों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तादाद अच्छी-खासी है। इन बच्चों के लिए स्कूल एक ऐसा मरकज़ है, जहां वे अपने बेहतर कल की बुनियाद रखते हैं। आग लगने की इस घटना के दौरान सेना और दमकल विभाग की टीमों ने जिस तरह से हालात का सामना किया, उससे यह जाहिर होता है कि आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर कार्रवाई और आपसी तालमेल कितना अहम होता है।

32 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कर्मचारियों ने मिलकर आग बुझाने के लिए लगातार कोशिशें जारी रखीं। पानी की सप्लाई खत्म होने के बावजूद वैकल्पिक इंतजाम करके अभियान को जारी रखना उनकी मुस्तैदी और जिम्मेदारी को दर्शाता है। अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो लपटें स्कूल के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती थीं और इमारत को ज्यादा नुकसान पहुंचने का अंदेशा था।

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा या किसी भी आपात स्थिति के दौरान सरकारी महकमों और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। स्थानीय आबादी के लिए यह बात अहम है कि मुश्किल वक्त में राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न विभाग मिलकर काम करें, ताकि लोगों की जान-माल और सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत की जा सके।

फिलहाल, आग लगने की वजह और स्कूल की इमारत को हुए संभावित नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। हालांकि, आग पर समय रहते काबू पा लिए जाने से राहत की बात है कि स्थिति को ज्यादा बिगड़ने से रोकने में कामयाबी मिली। डांगीवाचा के इस सरकारी स्कूल में हुए राहत अभियान के दौरान भारतीय सेना और दमकल विभाग की टीमों की कोशिशें काबिल-ए-तारीफ रहीं।

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