मंजूर की गई रकम में जम्मू क्लस्टर के लिए 240 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि श्रीनगर क्लस्टर को 235.41 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस योजना के तहत दोनों क्षेत्रों के कई आईटीआई संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा, ताकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक मशीनों, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और उद्योगों की ज़रूरतों से जुड़े कोर्सों का फायदा मिल सके। इस पहल को जम्मू-कश्मीर में तकनीकी शिक्षा और हुनरमंदी के क्षेत्र में एक अहम पेशकदमी के तौर पर देखा जा रहा है।
जम्मू क्लस्टर के अपग्रेडेशन का काम ईगल इंफ्रा इंडिया के साथ जोड़ा गया है। इस क्लस्टर में जम्मू, आरएस पुरा, नौशहरा, सांबा और कठुआ के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों को बेहतर बनाने के लिए 240 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है। वहीं, श्रीनगर क्लस्टर के लिए इंदरदीप इंफ्रा इंडिया के साथ काम किया जाएगा। इस क्लस्टर में श्रीनगर, गांदरबल, कंगन, बडगाम और चरार-ए-शरीफ के आईटीआई संस्थान शामिल हैं। इसके लिए 235.41 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
कश्मीर घाटी के नौजवानों के लिए यह पहल खास अहमियत रखती है। यहां बड़ी तादाद में ऐसे युवा हैं जो दसवीं या बारहवीं की पढ़ाई के बाद तकनीकी हुनर हासिल करके अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं। लेकिन बदलते औद्योगिक माहौल में सिर्फ पारंपरिक तालीम काफी नहीं होती, बल्कि आधुनिक तकनीक, मशीनों और कामकाजी हुनर से वाकिफ होना भी ज़रूरी है। आईटीआई संस्थानों के अपग्रेडेशन से विद्यार्थियों को ऐसी ट्रेनिंग हासिल करने में मदद मिल सकती है, जो उन्हें रोज़गार की दुनिया से बेहतर तरीके से जोड़ सके।
आज उद्योगों में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की मांग लगातार अहम बनी हुई है। इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, निर्माण, मशीन संचालन और दूसरी तकनीकी फील्डों में हुनरमंद लोगों के लिए अवसर मौजूद रहते हैं। ऐसे में अगर प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं और कोर्सों को उद्योगों की वास्तविक ज़रूरतों के मुताबिक तैयार किया जाता है, तो विद्यार्थियों को नौकरी हासिल करने के साथ-साथ अपना कारोबार शुरू करने में भी मदद मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर में बेरोज़गारी एक अहम सामाजिक और आर्थिक मसला है। ऐसे हालात में तकनीकी शिक्षा को मजबूत बनाना नौजवानों के लिए नए रास्ते खोल सकता है। खासकर दूरदराज़ इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों को अपने नज़दीकी संस्थानों में बेहतर प्रशिक्षण मिलने से काफी सहूलियत हो सकती है। इससे उन्हें हुनर सीखने के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की ज़रूरत भी कम पड़ सकती है, बशर्ते संस्थानों में पर्याप्त सुविधाएं और अच्छे प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएं।
हालांकि, इस योजना की असल कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि मंजूरशुदा रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, आधुनिक उपकरण कितनी जल्दी उपलब्ध होते हैं और प्रशिक्षण को उद्योगों की मांग के साथ किस हद तक जोड़ा जाता है। साथ ही, विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप, औद्योगिक संस्थानों के साथ सहयोग और नौकरी से संबंधित मार्गदर्शन की सुविधाएं भी अहम रहेंगी।
PM-SETU के तहत 475.41 करोड़ रुपये की यह मंजूरी जम्मू और श्रीनगर के आईटीआई संस्थानों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इससे जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को बेहतर तकनीकी तालीम, नए हुनर और रोज़गार के अधिक अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है।


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