हंदवाड़ा में सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किया हिजबुल मॉड्यूल, पिस्तौल और कारतूस बरामद


उत्तरी कश्मीर में अमन-ओ-अमान को कायम रखने और दहशतगर्दी के बचे-खुचे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की मुहिम के तहत सुरक्षा बलों को एक अहम कामयाबी मिली है। हंदवाड़ा इलाके में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से कथित तौर पर जुड़े एक पूर्व आतंकी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई ऐसे समय में अहम मानी जा रही है, जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र आतंकी संगठनों के ओवरग्राउंड और सहयोगी नेटवर्क को लगातार कमजोर करने पर जोर दे रहा है।

सुरक्षा बलों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान क्रुहमुरा निवासी मंजूर अहमद भट के तौर पर हुई है। उसे पूर्व आतंकी बताया गया है और आरोप है कि वह प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन के लिए एक हाइब्रिड ऑपरेटिव के तौर पर काम कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और उपलब्ध जानकारी के आधार पर की गई कार्रवाई के दौरान उसे हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, उसके पास से एक चीनी पिस्तौल, दो मैगजीन और 16 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। हथियारों की यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इलाके में किसी संभावित आतंकी गतिविधि या नेटवर्क को समर्थन देने की कोशिशों का संकेत मिल सकता है।

मंजूर अहमद भट का सुरक्षा एजेंसियों के साथ पहले भी सामना हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसे अतीत में दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद कथित तौर पर आतंकी नेटवर्क से दोबारा संपर्क में आने और उसकी गतिविधियों में शामिल होने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब उसके संपर्कों, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या वह अकेले तौर पर गतिविधियां चला रहा था या फिर उसके पीछे कोई बड़ा सहयोगी नेटवर्क मौजूद था।

हंदवाड़ा और कुपवाड़ा समेत उत्तरी कश्मीर का सीमावर्ती इलाका सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की सतर्कता और खुफिया तंत्र की सक्रियता का सीधा संबंध स्थानीय आबादी की सुरक्षा और इलाके में सामान्य हालात बनाए रखने से है। सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई से उन तत्वों पर दबाव बढ़ा है, जो किसी न किसी रूप में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए मदद, संपर्क या लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं। हाइब्रिड ऑपरेटिव की अवधारणा के तहत ऐसे लोगों पर विशेष नजर रखी जाती है, जो नियमित रूप से आतंकी संगठन के सदस्य के तौर पर सामने आए बिना उसके लिए चुनिंदा गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप झेलते हैं।

इस मामले में पुलिस ने एक नया मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां बरामद हथियारों के स्रोत और संभावित इस्तेमाल के साथ-साथ आरोपी के पुराने संपर्कों की भी पड़ताल कर सकती हैं। सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई को उत्तरी कश्मीर में सक्रिय सुरक्षा ग्रिड की सतर्कता के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसी कार्रवाइयों का मकसद केवल हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं होता, बल्कि आतंकवाद को जड़ से कमजोर करने के लिए उसके सहयोगी ढांचे को भी निष्क्रिय करना होता है।

कश्मीर की वादी में लंबे समय से अमन और तरक्की का माहौल मजबूत करने की कोशिशों के बीच सुरक्षा बलों और पुलिस की ऐसी कार्रवाई स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत देती है। हंदवाड़ा में हुई यह गिरफ्तारी इस बात को भी रेखांकित करती है कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क के किसी भी बचे-खुचे संपर्क या सहयोगी तंत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गिरफ्तार व्यक्ति की कथित भूमिका और उसके संभावित संपर्क किस हद तक फैले हुए थे।

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