पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टेलीविज़न चैनल पर इस मुद्दे पर जवाब देते हुए बेहद विरोधाभासी रवैया अपनाया।
विरोधाभासी बयानों का खेल
विश्लेषकों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तानी नेतृत्व की दोहरी रणनीति और ज़हनी उलझन को साफ बयां करता है। एक तरफ जहाँ सरकारी बयानबाजी में इस युद्धाभ्यास को नज़रअंदाज़ करने का नाटक किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ टीवी स्क्रीन पर आकर आवाम और मीडिया के सामने आक्रामक धमकियाँ दी जा रही हैं।
यह विरोधाभास पाकिस्तान की उस पुरानी आदत को उजागर करता है, जहाँ औपचारिक और राजनयिक तरीक़ों से किसी अधिसूचित (notified) सैन्य अभ्यास को निपटाने के बजाय, नेता टीवी बहसों में ऊंची आवाज और सख्त बयानों के जरिए घरेलू जनता को खुश करने की कोशिश करते हैं।
जिम्मेदार कूटनीति के बजाय टीवी ड्रामेबाजी
भारतीय पक्ष की ओर से यह एक पूर्व-अधिसूचित सैन्य युद्धाभ्यास (Notified Drill) है, जिसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत दी जाती है।
सामरिक विश्लेषकों का नज़रिया
सैन्य विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की यह पुरानी फितरत रही है कि वह सीमा पर होने वाली किसी भी हलचल का इस्तेमाल अपनी अंदरूनी नाकामियों को छिपाने के लिए करता है। ख्वाजा आसिफ का यह क्लिप अब सोशल मीडिया और रणनीतिक हल्कों में पाकिस्तान की गैर-संजीदा कूटनीति की एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
एक तरफ जहां सीमा पार सुरक्षा बल अपनी नियमित तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के रहनुमा टीवी स्टूडियो में बैठकर जंग की हुंकार भर रहे हैं।


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