पाकिस्तान में LeT के मंच से बड़ा कबूलनामा, नसीर मदनी का दावा—हाफिज सईद ने कश्मीर भेजे 10 हजार आतंकी

 


पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और कश्मीर के खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे हिंसक अभियान को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। 14 अगस्त 2026 को बहावलनगर में LeT से जुड़े एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी मौलवी नसीर मदनी ने कथित तौर पर कश्मीर में आतंकियों की तैनाती के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान मदनी ने अपने भाषण में कहा कि LeT संस्थापक हाफिज सईद ने कश्मीर में 10,000 आतंकियों को भेजा था। उनके इस कथित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुआ है।

मदनी का यह कथित बयान इसलिए चर्चा में आया है क्योंकि इसमें कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की कथित भूमिका का सीधे तौर पर जिक्र किया गया। LeT की आतंकी गतिविधियों और उसके पाकिस्तान-आधारित नेटवर्क के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से रिकॉर्ड मौजूद हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची के अनुसार Lashkar-e-Taiba (LeT) पाकिस्तान स्थित एक आतंकी संगठन है, जिसे सैन्य और नागरिक ठिकानों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ा गया है। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में हाफिज मुहम्मद सईद को LeT का नेता बताया गया है और उसे दिसंबर 2008 से प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है।

ऐसे में बहावलनगर के कार्यक्रम में सामने आया मदनी का कथित बयान एक ऐसे संगठन के संदर्भ में आया है, जिसका नाम पहले से ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड में दर्ज है। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में LeT द्वारा आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण तथा आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तीय और रसद संबंधी सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख मिलता है।

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की गतिविधियां केवल हथियारों और घुसपैठ तक सीमित नहीं रही हैं। भर्ती, प्रशिक्षण, कट्टरपंथी प्रचार, वित्तीय सहायता, नशीले पदार्थों और सीमा पार हिंसा जैसे विभिन्न माध्यमों के जरिए आतंक के नेटवर्क को संचालित करने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं।

नसीर मदनी के कथित बयान में कश्मीर में आतंकियों की तैनाती का जो जिक्र हुआ है, वह इसी व्यापक आतंकी नेटवर्क की ओर ध्यान खींचता है। यदि वीडियो में मौजूद बयान का संदर्भ और शब्दांकन सही रूप से प्रस्तुत किया गया है, तो यह पाकिस्तान में मौजूद कुछ कट्टरपंथी मंचों पर आतंकवाद से जुड़ी विचारधारा के सार्वजनिक प्रदर्शन का एक और उदाहरण माना जा सकता है।

हालांकि, इस कथित बयान के आधार पर पाकिस्तान सरकार या किसी विशिष्ट सरकारी एजेंसी की प्रत्यक्ष भूमिका स्थापित करना उचित नहीं होगा। 10,000 आतंकियों को भेजे जाने संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक है। इसलिए इस आंकड़े को स्थापित तथ्य के बजाय नसीर मदनी के कथित दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

फिर भी, LeT जैसे प्रतिबंधित संगठन से जुड़े मंच पर कश्मीर में आतंकियों की तैनाती का ऐसा कथित जिक्र पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की प्रकृति और उसके पुराने कश्मीर-केंद्रित एजेंडे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घटनाक्रम इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सीमा पर घुसपैठ रोकने तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि भर्ती, प्रशिक्षण, वित्तपोषण, प्रचार और कट्टरपंथी विचारधारा के पूरे तंत्र को समझना और उजागर करना भी जरूरी है।

बहावलनगर में सामने आया यह कथित बयान इसी वजह से महत्वपूर्ण है। बयान में किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि भले ही बाकी हो, लेकिन जिस मंच से यह बात सामने आई और जिस संगठन का संदर्भ इसमें आया, वह कश्मीर में दशकों से चले आ रहे सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ले आता है।

स्रोत/वीडियो: नसीर मदनी के बयान का X पोस्ट — Kashmir Conflict Stories

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