सरदार उमर नज़ीर ने सैयद इख़लाक़ गिलानी के नाम जारी अपने सार्वजनिक पैग़ाम में कहा कि अगर दूसरी तरफ़ से बातचीत के सिलसिले में एक क़दम आगे बढ़ाया जाता है, तो JAAC दो क़दम आगे बढ़ने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सिर्फ़ धरना समाप्त करवाने की गरज़ से होने वाली बातचीत का कोई ख़ास मतलब नहीं है। उनके बयान से ज़ाहिर होता है कि आंदोलन अपने मौजूदा दबाव को बिना ठोस आश्वासन के कम करने के मूड में नहीं है।
JAAC से जुड़े इस रुख को उस समय अहम माना जा रहा है जब बड़े पैमाने पर लोग धरना और विरोध प्रदर्शनों में मौजूद दिखाई दे रहे हैं। आंदोलन से जुड़े दृश्य बताते हैं कि आम लोगों की बड़ी तादाद अब भी इसके साथ खड़ी है। ऐसे में सरदार उमर नज़ीर का बयान बातचीत के लिए दरवाज़ा पूरी तरह बंद करने के बजाय शर्तों के साथ बातचीत की पेशकश के तौर पर सामने आया है।
उनका कहना है कि अगर बातचीत का नतीजा लोगों के सामने ठोस तौर पर आए और उसमें अवामी मसाइल के हल की दिशा में प्रगति दिखाई दे, तो JAAC लचीला रुख अपनाने को तैयार है। मगर अगर बातचीत सिर्फ़ यह सुनिश्चित करने तक सीमित रहे कि लोग सड़कों और धरने से वापस चले जाएं, तो ऐसी बातचीत को आंदोलन के लिए क़बूल करना मुश्किल होगा।
इस बयान में एक तरफ़ बातचीत की गुंजाइश रखी गई है, वहीं दूसरी तरफ़ आंदोलन की मांगों और दबाव को बरक़रार रखने का संकेत भी दिया गया है। सरदार उमर नज़ीर का यह संदेश इस बात पर ज़ोर देता है कि किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों की तरफ़ से बराबर और मानीखेज़ पहल ज़रूरी है।
JAAC के मौजूदा रुख से यह भी संकेत मिलता है कि आंदोलन फिलहाल एकतरफ़ा तौर पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। संगठन बातचीत को तभी आगे बढ़ाना चाहता है जब उसके नतीजे ज़मीन पर दिखाई दें और अवामी मांगों के सिलसिले में स्पष्ट प्रगति हो।
बड़े जनसमूह की मौजूदगी और सरदार उमर नज़ीर के बयान को साथ रखकर देखा जाए तो फिलहाल JAAC की रणनीति दबाव बनाए रखते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखने की नज़र आती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दूसरी तरफ़ से इस पैग़ाम का क्या जवाब आता है और क्या बातचीत को सिर्फ़ धरना खत्म करवाने के बजाय वास्तविक मसाइल के हल की तरफ़ ले जाने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है।
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