JAAC का OIC और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को खुला न्योता, पीओजेके के हालात देखने की अपील


पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके से एक अहम और गौरतलब ख़बर सामने आ रही है। इलाके में अवाम का एहतिजाज एक बार फिर तेज़ होता नज़र आ रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC ने 9 जुलाई को बड़े पैमाने पर एहतिजाज का एलान किया है। साथ ही, इस तंजीम ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपील की है कि वे पीओजेके का दौरा करें, ताकि वहां की ज़मीनी हक़ीक़त दुनिया के सामने लाई जा सके।

पीओजेके में बीते कुछ महीनों से अवाम लगातार अपने बुनियादी हुक़ूक़, बेहतर इंतज़ामिया और जवाबदेही की मांग को लेकर आवाज़ बुलंद कर रही है। अब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने एक नया कदम उठाते हुए OIC और दुनिया भर के मीडिया इदारों को खुला न्योता दिया है कि वे इलाके का दौरा करें और वहां के हालात का अपनी आंखों से जायज़ा लें।

JAAC का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय नुमाइंदे और मीडिया मौके पर पहुंचेंगे तो दुनिया को यह मालूम होगा कि पीओजेके के लोगों को किन मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है। तंजीम का दावा है कि स्थानीय आबादी अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुंचाना चाहती है और उसे उम्मीद है कि बाहरी निगरानी से हालात पर अंतरराष्ट्रीय तवज्जो बढ़ेगी।

इसी सिलसिले में JAAC ने 9 जुलाई को नए एहतिजाज और मुख़्तलिफ़ इलाकों में अमनपसंद विरोध-प्रदर्शनों का भी एलान किया है। तंजीम ने लोगों से अपील की है कि वे बड़ी तादाद में शामिल होकर अपने जायज़ मुतालिबात को पुरअमन तरीके से सामने रखें।

सियासी जानकारों का मानना है कि OIC और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिया गया यह न्योता इस पूरे मसले को वैश्विक स्तर पर उठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी इलाके की असली तस्वीर सामने लाने में स्वतंत्र मीडिया और अंतरराष्ट्रीय निगरानी अहम किरदार निभाते हैं।

दूसरी तरफ़, यह भी कहा जा रहा है कि बाहरी जांच और मीडिया की मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान की हुकूमत और स्थानीय इंतज़ामिया सहज नज़र नहीं आती। आलोचकों का आरोप है कि बाहरी निगरानी को सीमित रखने की कोशिशें जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अलग रुख़ सामने आता रहा है।

माहिरीन का कहना है कि आने वाले दिनों में 9 जुलाई के एहतिजाज और OIC व अंतरराष्ट्रीय मीडिया की इस अपील पर दुनिया की नज़र रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और मीडिया इस मामले में दिलचस्पी दिखाते हैं, तो पीओजेके से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक बहस और भी तेज़ हो सकती है।

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