जम्मू-कश्मीर प्रशासन का मक़सद सिर्फ़ नशे के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अवाम, ख़ास तौर पर नौजवानों और ख़वातीन के बीच जागरूकता पैदा करना भी है। यही वजह है कि इस मुहिम में समाज के हर तबक़े की भागीदारी देखने को मिल रही है। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, शैक्षणिक इदारों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों के ज़रिये बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नई नस्ल को नशे की लत से दूर रखकर उन्हें बेहतर और रोशन मुस्तक़बिल की राह दिखाई जा सके।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि नशा सिर्फ़ एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि नौजवानों के भविष्य और समाज की तरक़्क़ी के सामने एक बड़ी चुनौती है। उनकी रहनुमाई में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जन-जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को इस अभियान का बुनियादी हिस्सा बनाया है। यही समन्वित प्रयास आज जम्मू-कश्मीर को नशा मुक्ति अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इस मुहिम की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसमें युवाओं और महिलाओं की सक्रिय शिरकत देखने को मिल रही है। विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों, संवाद अभियानों और सामाजिक पहलों के ज़रिये लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से आगाह किया जा रहा है। समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन की शक्ल दे दी है, जिससे नशे के ख़िलाफ़ सामूहिक ज़िम्मेदारी का एहसास भी मज़बूत हुआ है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन का यह प्रयास सुशासन, जवाबदेह प्रशासन और जनहित के प्रति उसकी वाबस्तगी को भी उजागर करता है। व्यापक जनसंपर्क, स्थानीय स्तर पर सहभागिता और निरंतर जागरूकता अभियानों ने यह साबित किया है कि जब प्रशासन और अवाम मिलकर किसी सामाजिक चुनौती का सामना करते हैं, तो सकारात्मक नतीजे सामने आते हैं। यही वजह है कि नशा मुक्त अभियान में जम्मू-कश्मीर आज देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर सामने आया है।
"नशा मुक्त कश्मीर" का यह पैग़ाम सिर्फ़ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के सुरक्षित, सेहतमंद और तरक़्क़ीपसंद भविष्य का अज़्म है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की रहनुमाई और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की सतत कोशिशें इस बात की गवाही देती हैं कि नौजवानों को नशे से दूर रखकर उन्हें तालीम, हुनर और तरक़्क़ी के बेहतर मौक़े उपलब्ध कराना ही एक खुशहाल और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर की बुनियाद है। इसी सोच के साथ जम्मू-कश्मीर नशा मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को मज़बूती देने के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभर रहा है।


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