बहावलपुर से क्वेटा तक जैश-ए-मोहम्मद की खुली गतिविधियाँ, पाकिस्तान का 'टेरर इकोसिस्टम' फिर बेनकाब

श्रीनगर, 27 जुलाई: पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी तंजीम जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की हालिया सरगर्मियों ने एक बार फिर इस दावे को मज़बूत किया है कि मुल्क की सरज़मीन आज भी भारत-विरोधी आतंकी नेटवर्क के लिए महफ़ूज़ पनाहगाह बनी हुई है। बहावलपुर और क्वेटा में आयोजित बड़े पैमाने के कार्यक्रमों ने पाकिस्तान के उस नैरेटिव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई का दावा करता रहा है।

मिली मालूमात के मुताबिक, 18 और 19 जुलाई 2026 को बहावलपुर स्थित मरकज़ सुभानअल्लाह में जैश-ए-मोहम्मद का दो दिवसीय सालाना इज्तिमा आयोजित किया गया, जिसमें 1,000 से ज़्यादा कैडरों ने शिरकत की। इतने बड़े स्तर पर आयोजित यह जमावड़ा इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि प्रतिबंधित तंजीम अब भी पाकिस्तान में बिना किसी ख़ौफ़ के अपनी गतिविधियाँ अंजाम दे रही है।

इसी दौरान 17 से 24 जुलाई 2026 तक क्वेटा (अधिकृत बलूचिस्तान) में जैश-ए-मोहम्मद की ओर से 'दौरा-ए-तरबियाह' नामक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन के सदस्यों को विचारधारा और अन्य गतिविधियों से जुड़ी तरबियत दी गई। साथ ही, संगठन के सरगना मौलाना मसूद अज़हर के भी इस कार्यक्रम में पहुँचने की उम्मीद जताई गई थी।

सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन का खुलेआम बड़े इज्तिमे आयोजित करना और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान में ऐसे नेटवर्क को न सिर्फ़ जगह मिल रही है, बल्कि उन्हें अपनी गतिविधियाँ जारी रखने की खुली आज़ादी भी हासिल है।

विश्लेषकों का कहना है कि बहावलपुर और क्वेटा की ये हालिया घटनाएँ पाकिस्तान के उस आतंकी ढाँचे को उजागर करती हैं, जहाँ प्रतिबंधित तंजीमें अब भी खुले तौर पर सक्रिय हैं। इससे क्षेत्रीय अमन-ओ-अमान और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा होती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने भी यह सवाल खड़ा होता है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की प्रतिबद्धता वास्तव में कितनी प्रभावी है।

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