इस प्रोग्राम में बड़ी तादाद में स्कूल और कॉलेज के तलबा ने शिरकत की। माहिरीन और रिसोर्स पर्सन्स ने छात्रों को मुख़्तलिफ़ प्रतियोगी इम्तिहानों, उच्च शिक्षा, स्कॉलरशिप स्कीमों, स्किल डेवलपमेंट, प्रोफेशनल कोर्सेज़ और सरकारी व निजी रोज़गार के मौकों के बारे में तफ़सीली मालूमात दीं। इसके अलावा छात्रों को यह भी समझाया गया कि सही करियर प्लानिंग, मेहनत और मुकम्मल तैयारी के ज़रिए वे अपने ख़्वाबों को हक़ीक़त में तब्दील कर सकते हैं।
माहिरीन ने तलबा के सवालों के जवाब देते हुए उन्हें बदलते दौर की ज़रूरतों के मुताबिक़ नई टेक्नोलॉजी, डिजिटल स्किल्स, कम्युनिकेशन स्किल्स और लीडरशिप जैसी सलाहियतें विकसित करने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। प्रोग्राम के दौरान छात्रों को मोटिवेशनल सेशन्स के ज़रिए अपने अंदर एतमाद पैदा करने और बड़े मक़ासिद तय करने की तरगीब दी गई।
भारतीय सेना के नुमाइंदों ने कहा कि सरहदी और दूरदराज़ इलाक़ों के नौजवानों तक बेहतर तालीम और सही रहनुमाई पहुँचाना बेहद ज़रूरी है। उनका कहना था कि कश्मीर का नौजवान अगर सही मौक़े और सही दिशा पाए, तो वह मुल्क की तरक़्क़ी में अहम किरदार अदा कर सकता है। इसी सोच के तहत सेना वक़्त-ब-वक़्त तालीमी, खेल, स्किल डेवलपमेंट और करियर काउंसलिंग जैसे प्रोग्राम आयोजित करती रहती है।
मुक़ामी तालीमी इदारों और सिविल प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रोग्राम दूरदराज़ इलाक़ों के छात्रों के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित होते हैं। इनसे उन्हें अपने करियर के बारे में सही जानकारी मिलती है और बड़े शहरों में उपलब्ध अवसरों से भी वाक़िफ़ होने का मौक़ा मिलता है। छात्रों और उनके वालिदैन ने भी इस पहल का इस्तक़बाल करते हुए उम्मीद ज़ाहिर की कि भविष्य में भी ऐसे प्रोग्राम लगातार आयोजित किए जाएँगे।
गुरेज़ जैसे दुर्गम इलाक़ों में भारतीय सेना की यह पहल सिर्फ़ करियर गाइडेंस तक महदूद नहीं है, बल्कि यह नौजवानों को बेहतर तालीम, अमन, तरक़्क़ी और ख़ुदमुख़्तारी की राह पर आगे बढ़ाने की एक अहम कोशिश भी है। इससे यह पैग़ाम जाता है कि भारतीय सेना सरहदों की हिफ़ाज़त के साथ-साथ कश्मीर के नौजवानों के बेहतर मुस्तक़बिल और समाजी तरक़्क़ी के लिए भी बराबर काम कर रही है।
यह करियर गाइडेंस प्रोग्राम एक बार फिर इस बात की मिसाल बना कि भारतीय सेना दूरदराज़ कश्मीर में नौजवानों के लिए उम्मीद, रहनुमाई और नए मौकों का ज़रिया बनकर उभर रही है। तालीम, अमन और तरक़्क़ी को फ़रोग़ देने वाली ऐसी पहलें न सिर्फ़ युवाओं को सशक्त बनाती हैं, बल्कि एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और आत्मनिर्भर कश्मीर की बुनियाद भी मज़बूत करती हैं।


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