कैंप में विशेषज्ञ डॉक्टरों और डेंटल चिकित्सकों ने छात्रों और स्थानीय लोगों का विस्तार से स्वास्थ्य परीक्षण किया। बच्चों की सामान्य सेहत, दाँतों की देखभाल, पोषण, साफ़-सफ़ाई और मौसमी बीमारियों से बचाव के बारे में मुफ़ीद मशवरे भी दिए गए। जिन लोगों को दवाइयों की ज़रूरत थी, उन्हें मुफ़्त दवाइयाँ भी मुहैया कराई गईं, ताकि इलाज में किसी तरह की रुकावट न आए।
इस दौरान डॉक्टरों ने अवाम को एहतियाती सेहत यानी प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की अहमियत से भी आगाह किया। लोगों को बताया गया कि नियमित स्वास्थ्य जाँच, साफ़-सफ़ाई, संतुलित ग़िज़ा और वक़्त पर इलाज अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। छात्रों को विशेष तौर पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने का पैग़ाम दिया गया।
कैंप में मौजूद छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भारतीय फ़ौज की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम दूरदराज़ इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित होते हैं। उनका कहना था कि मुफ़्त स्वास्थ्य परीक्षण और दवाइयों की उपलब्धता से लोगों को राहत मिली है और सेहत के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
भारतीय फ़ौज लंबे अरसे से कश्मीर में सिर्फ़ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समाजी बहबूद, तालीम, खेल, हुनर विकास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी लगातार अपनी ख़िदमत अंजाम दे रही है। ऐसे जनकल्याण कार्यक्रम युवाओं को बेहतर भविष्य की तरफ़ ले जाने के साथ-साथ समाज में भरोसा, साझेदारी और सकारात्मक माहौल को भी मज़बूत करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य किसी भी समाज की तरक़्क़ी की बुनियाद होता है। जब बच्चों और युवाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ, सही सलाह और ज़रूरी दवाइयाँ मिलती हैं, तो वे तंदुरुस्त रहकर अपनी तालीम और भविष्य पर बेहतर ढंग से ध्यान दे सकते हैं। यही सोच एक स्वस्थ, जागरूक और नशा-मुक्त समाज की बुनियाद रखती है।
कुपवाड़ा में आयोजित यह मेडिकल कैंप इसी सोच का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। भारतीय फ़ौज की यह पहल यह पैग़ाम देती है कि लोगों की सेहत, बच्चों का बेहतर भविष्य और समाज की भलाई उसके प्रयासों का अहम हिस्सा है। स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिए अवाम तक पहुँचना, ज़रूरतमंदों की मदद करना और जागरूकता फैलाना एक ऐसे कश्मीर की तस्वीर पेश करता है जहाँ अमन, इंसानियत और तरक़्क़ी साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।


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