बांदीपोरा में 4 किलो IED बरामद, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा


कश्मीर में अमन को नुक़सान पहुँचाने की एक और साज़िश सुरक्षाबलों की मुस्तैद कार्रवाई की बदौलत नाकाम हो गई। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में सुरक्षाबलों ने एक ख़ुफ़िया इत्तिला के आधार पर तलाशी मुहिम चलाते हुए लगभग 4 किलोग्राम वज़नी इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किया। यह IED एक प्रेशर कुकर के भीतर बेहद चालाकी से छिपाकर रखा गया था, ताकि किसी भी वक़्त बड़ी तबाही मचाई जा सके।

सुरक्षाबलों ने पूरे इलाक़े को फ़ौरन घेर लिया और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। तमाम सुरक्षा एहतियात अपनाते हुए विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया। इस कार्रवाई की वजह से न सिर्फ़ एक संभावित बड़ा हादसा टल गया, बल्कि बेगुनाह नागरिकों की जान-माल की भी हिफ़ाज़त सुनिश्चित हुई।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह विस्फोटक आम लोगों, सुरक्षाबलों या सार्वजनिक आवाजाही को निशाना बनाने के इरादे से छिपाया गया था। अगर यह IED समय रहते बरामद न होता, तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते थे। मगर सुरक्षाबलों की तेज़ कार्रवाई और पुख़्ता ख़ुफ़िया तंत्र ने दहशतगर्दों की पूरी योजना को नाकाम बना दिया।

बीते कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मज़बूत बनाया गया है। ख़ुफ़िया एजेंसियों, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल की बदौलत आतंकवादी गतिविधियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। यही वजह है कि दहशतगर्दों के मंसूबे एक-एक कर बेनक़ाब हो रहे हैं और उनके नेटवर्क को लगातार कमज़ोर किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी संगठन अब सीधे हमले करने के बजाय IED और छिपे हुए विस्फोटकों का इस्तेमाल कर डर और अस्थिरता फैलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की आधुनिक निगरानी व्यवस्था, तकनीकी क्षमता और स्थानीय स्तर पर मिल रहे सहयोग के कारण ऐसे प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं।

बांदीपोरा की यह घटना एक बार फिर इस बात का सबूत है कि आतंकवाद के प्रति "ज़ीरो टॉलरेंस" की नीति केवल एक नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से आतंक के पूरे इकोसिस्टम को कमज़ोर किया जा रहा है, जिससे नए भर्ती नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और विस्फोटक पहुँचाने जैसी गतिविधियों पर भी अंकुश लग रहा है।

स्थानीय लोगों ने भी सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते उठाए गए इस क़दम ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। उनका कहना है कि वादी में लोग अब अमन, तालीम, कारोबार और तरक़्क़ी के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं और दहशतगर्दी के लिए अब समाज में पहले जैसी कोई जगह नहीं बची है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकवादी संगठनों की ऐसी नाकाम कोशिशें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि घाटी में सामान्य हालात और विकास की प्रक्रिया उन्हें रास नहीं आ रही। इसलिए वे बीच-बीच में हिंसा और दहशत का माहौल पैदा करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जनता के सहयोग से इन साज़िशों को लगातार विफल किया जा रहा है।

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