मुकामी रिपोर्टों के मुताबिक़, एहतिजाज के दौरान कई जगहों पर सुरक्षाबलों और मुज़ाहिरीन के बीच झड़पें भी हुईं। इन झड़पों में कम-अज़-कम 11 से 15 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं, जबकि बड़ी तादाद में लोग ज़ख्मी भी हुए हैं। हालात को काबू में करने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने कई इलाकों में अतिरिक्त फ़ोर्स तैनात कर दी है और लोगों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।
एहतिजाज करने वाले लोगों का कहना है कि वे सालों से आर्थिक तंगी, बेरोज़गारी, महंगाई और बुनियादी सहूलियतों की कमी का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी परेशानियों की तरफ़ कभी कोई गंभीर तवज्जो नहीं दी गई। उनका इल्ज़ाम है कि हुकूमत और फ़ौज ने हमेशा उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की और इलाके के असली मसलों को नज़रअंदाज़ किया।
इस बीच, पाकिस्तानी हुकूमत ने एहतिजाज से जुड़े संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर सख़्त कार्रवाई करते हुए उसे आतंकवाद रोधी क़ानूनों के तहत बैन कर दिया है। हुकूमत के इस फ़ैसले के बाद इलाके में सियासी माहौल और ज़्यादा गर्म हो गया है। मुज़ाहिरीन का कहना है कि शांतिपूर्ण एहतिजाज को दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी क़ानूनों का इस्तेमाल करना अवामी हक़ूक़ पर सीधा हमला है।
पीओजेके के कई इलाकों में दुकानों के शटर बंद रहे और आम ज़िंदगी भी काफी हद तक मुतास्सिर दिखाई दी। सड़कों पर निकले लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर इंसाफ़ और आज़ादी की मांग करते नज़र आए। महिलाओं और नौजवानों की बड़ी तादाद ने भी एहतिजाज में हिस्सा लिया, जिससे यह साफ़ दिखाई देता है कि यह नाराज़गी किसी एक तबके तक महदूद नहीं है, बल्कि समाज के हर हिस्से में फैली हुई है।
मुकामी लोगों का कहना है कि बरसों से इलाके के संसाधनों का इस्तेमाल तो किया गया, लेकिन यहां के लोगों को उनका हक़ नहीं मिला। उनका आरोप है कि पीओजेके को एक ऐसे इलाके की तरह चलाया गया, जहां अवाम की राय और ज़रूरतों की कोई अहमियत नहीं है। यही वजह है कि अब लोग खुलकर अपने हक़ूक़ और बेहतर मुस्तक़बिल की मांग कर रहे हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि लगातार पांच दिनों तक चले इन बड़े एहतिजाजों ने इलाके में मौजूद गहरे असंतोष को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि अगर लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और मसलों का शांतिपूर्ण हल तलाश नहीं किया गया, तो हालात और ज़्यादा पेचीदा हो सकते हैं।
एहतिजाज में शामिल कई लोगों ने कहा कि वे डर और दमन के माहौल में अब और नहीं जीना चाहते। उनका कहना है कि उनकी जंग किसी एक शख्स या इदारे के खिलाफ़ नहीं, बल्कि अपने बुनियादी हक़ूक़, इंसाफ़ और बेहतर ज़िंदगी के लिए है। लोगों ने मांग की कि इलाके में हिंसा को रोका जाए, राजनीतिक आज़ादी का एहतराम किया जाए और अवाम की आवाज़ को दबाने के बजाय सुना जाए।
फिलहाल पीओजेके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सड़कों पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है, जबकि मुज़ाहिरीन ने भी अपना एहतिजाज जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में पूरे इलाके की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हुकूमत इस बढ़ते अवामी ग़ुस्से और बेचैनी से किस तरह निपटती है और क्या लोगों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।


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