हिमालय की गोद में योग: करनाह की सरहदों से उठा स्वास्थ्य और सद्भाव का संदेश

 


कुपवाड़ा/करनाह: जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्र करनाह में 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े उत्साह, उमंग और जनभागीदारी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर साधना टॉप, दाना तथा ऐतिहासिक टीटवाल गांव में विशेष योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें सिविल प्रशासन, भारतीय सेना, आयुष विभाग के अधिकारियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बर्फ से ढकी हिमालयी पर्वतमालाओं की मनमोहक पृष्ठभूमि में सैकड़ों लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य, शांति और सामूहिक एकता का संदेश दिया।

सुबह की ताज़ी हवा और पर्वतीय वातावरण के बीच आयोजित इन कार्यक्रमों ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

साधना टॉप, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सामरिक महत्व के लिए जाना जाता है, वहां आयोजित योग कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विशाल पर्वत श्रृंखलाओं और हरियाली के बीच सैकड़ों प्रतिभागियों ने एक साथ योगासन किए। यह दृश्य न केवल मनमोहक था बल्कि यह भी दर्शाता था कि योग किस प्रकार लोगों को एक मंच पर लाकर स्वास्थ्य और सद्भावना का संदेश देता है।

टीटवाल और दाना क्षेत्रों में भी स्थानीय लोगों, युवाओं और विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने योग के प्रति गहरी रुचि दिखाई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और तनावमुक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम के दौरान आयुष विभाग के अधिकारियों ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक तनाव को कम करने और जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

भारतीय सेना के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर योगाभ्यास किया। सेना की इस सहभागिता ने यह संदेश दिया कि सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और जनसंपर्क भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम सेना और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को और मजबूत बनाते हैं।

करनाह जैसे दूरस्थ और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन विशेष महत्व रखता है। नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट स्थित इन इलाकों में अक्सर कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होकर योग करना इस बात का प्रतीक है कि स्वास्थ्य, शांति और सकारात्मक सोच किसी भी परिस्थिति से ऊपर है।

स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि योग ने दुनिया भर में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी है और आज यह वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण का प्रतीक बन चुका है।

कार्यक्रम के दौरान कई सांस्कृतिक और जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिनका उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ जीवन, अनुशासन और सकारात्मक सोच के प्रति प्रेरित करना था। प्रतिभागियों ने योग दिवस के अवसर पर सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे नियमित योगाभ्यास करेंगे और अपने परिवार तथा समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएंगे।

करनाह के साधना टॉप, दाना और टीटवाल में आयोजित यह भव्य आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सरकार, आयुष विभाग और भारतीय सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर गंभीर हैं। ऐसे कार्यक्रम न केवल लोगों को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और आपसी विश्वास को भी मजबूत बनाते हैं।

बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों की गोद में आयोजित यह योग उत्सव केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह शांति, सद्भाव और सामूहिक शक्ति का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। करनाह की सरहदों से उठी यह सकारात्मक पहल पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि योग केवल शरीर को नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी जोड़ने की शक्ति रखता है।

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