पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए फिर भारत पर लगा रहा है बेबुनियाद इल्ज़ाम


पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने उनकी सरकार की घबराहट और नाकामी को सबके सामने ला दिया है। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे जेएएसी (JAAC) आंदोलन पर आरोप लगाया है कि उसे ब्रिटेन में रहने वाले कुछ लोगों और भारत से मदद मिल रही है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।

असलियत यह है कि पीओजेके में पिछले काफी समय से लोग अपनी रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। वहां के लोग महंगी बिजली, आटे की बढ़ती कीमतों और खराब बुनियादी सुविधाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। लेकिन इन जायज़ मांगों को सुनने और उनका हल निकालने के बजाय पाकिस्तान की हुकूमत हमेशा की तरह इसका ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की कोशिश कर रही है।

यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने अपनी घरेलू नाकामियों को छुपाने के लिए भारत का नाम लिया हो। मुल्क में आर्थिक बदहाली हो, महंगाई आसमान छू रही हो, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही हो या फिर अवाम सड़कों पर एहतिजाज कर रही हो, पाकिस्तान के हुक्मरान हर बार एक ही राग अलापते हैं कि इसके पीछे भारत का हाथ है। मगर अवाम अब इस पुराने और घिसे-पिटे नैरेटिव को समझने लगी है।

वुछिव, पीओजेके के लोग जो मांग कर रहे हैं, वह कोई सियासी साजिश नहीं बल्कि उनके बुनियादी हकूक हैं। सस्ती बिजली, रियायती आटा और बेहतर स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं। लेकिन पाकिस्तान इन जायज़ मांगों को मानने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने और उस पर पाबंदी लगाने की कोशिश कर रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है।

ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान को कई लोग पाकिस्तान की बौखलाहट का सबूत मान रहे हैं। जुलाई 2026 के चुनाव नज़दीक आते ही सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है और वह लोगों के असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी का सहारा ले रही है। यह वही पुराना तरीका है, जिसमें पाकिस्तान अपने अंदरूनी संकटों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश करता है ताकि दुनिया का ध्यान उसकी नाकामियों से हट जाए।

हकीकत यह है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में लोगों का अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना एक सामान्य बात है। अगर अवाम बिजली, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही है, तो इसका जवाब बातचीत और सुधारों से दिया जाना चाहिए, न कि बेबुनियाद इल्ज़ामों और साजिश की कहानियों से।

पाकिस्तान को यह समझना होगा कि हर समस्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने से उसके नागरिकों की परेशानियां कम नहीं होंगी। अवाम को बेहतर शासन, पारदर्शिता और विकास चाहिए। मगर अफसोस, वहां की हुकूमत अब भी झूठे नैरेटिव और प्रोपेगेंडा के सहारे अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।

आज पीओजेके से उठ रही आवाज यही कह रही है कि असली मसला बाहर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अपने निज़ाम और उसकी नीतियों में है। जब तक इन हकीकतों का सामना नहीं किया जाएगा, तब तक इल्ज़ामों का यह सिलसिला चलता रहेगा और अवाम की मुश्किलें ज्यों की त्यों बनी रहेंगी।

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