शाम-ए-शफ़क़त 2026 : रंगों, रिवायतों और मोहब्बत से सजा पट्टन, गूंजा "एकता में अनेकता" का पैगाम


बारामूला जिले के पट्टन में उस वक्त एक दिलकश और यादगार मंज़र देखने को मिला जब भारतीय सेना की 30 राष्ट्रीय राइफल्स (महार रेजिमेंट) ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर के साथ मिलकर भव्य सांस्कृतिक उत्सव "शाम-ए-शफ़क़त 2026" का आयोजन किया। 18 जून 2026 को ज़ोरावर हॉल में आयोजित इस शानदार कार्यक्रम ने कश्मीर की वादी को देश के अलग-अलग रंगों और रिवायतों से सराबोर कर दिया।

जनाब, ये महज़ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि हिंदुस्तान की विविधता और एकता का ऐसा खूबसूरत संगम था जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। पंजाब के जोशीले भांगड़ा कलाकार हों, राजस्थान की रंग-बिरंगी घूमर हो, गुजरात का गरबा, महाराष्ट्र की लोक परंपराएं, मणिपुर की मनमोहक नृत्य शैली या फिर ओडिशा का पारंपरिक संगीत—हर प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ज़ोरावर हॉल तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी के नारों से लगातार गूंजता रहा। बड़ी तादाद में पहुंचे स्थानीय लोग, स्कूली छात्र-छात्राएं और एनसीसी कैडेट्स पूरे जोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम का हिस्सा बने। खास तौर पर कश्मीरी नौजवानों और बच्चों ने देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति को बेहद करीब से देखा और उसे खुले दिल से सराहा।

कार्यक्रम के दौरान वादी के नौजवानों के चेहरों पर जो मुस्कुराहट और उत्साह दिखाई दिया, वह इस बात का सबूत था कि सांस्कृतिक मेल-जोल लोगों के दिलों को जोड़ने का सबसे खूबसूरत जरिया है। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि "एक भारत श्रेष्ठ भारत" और "एकता में अनेकता" का मजबूत संदेश भी दिया।

दरअसल, कश्मीर की धरती हमेशा से सूफी संस्कृति, भाईचारे और मेल-मोहब्बत की मिसाल रही है। ऐसे आयोजनों से यहां की नई पीढ़ी को देश की विविध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है और आपसी समझ तथा भाईचारे को नई मजबूती मिलती है।

इस मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम वादी में सकारात्मक माहौल को बढ़ावा देते हैं और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों की संस्कृति को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। कई विद्यार्थियों ने कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और विभिन्न राज्यों की कला एवं संगीत के बारे में जानकारी हासिल की।

बहरहाल, "शाम-ए-शफ़क़त 2026" ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब संस्कृति, कला और इंसानी रिश्ते एक मंच पर आते हैं तो दूरियां खुद-ब-खुद मिट जाती हैं। पट्टन में सजी यह रंगीन शाम "नया कश्मीर" की उसी तस्वीर को पेश करती है, जहां तरक्की के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता को भी बराबर अहमियत दी जा रही है।

ये शानदार आयोजन इस बात की गवाही देता है कि सांस्कृतिक सहभागिता सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और मजबूत राष्ट्र निर्माण की एक अहम कड़ी है। वादी में गूंजती तालियों और मुस्कुराते चेहरों ने यही पैगाम दिया—"अनेक रंग, अनेक संस्कृतियां, मगर एक हिंदुस्तान।"

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