सहारा भी छूटा, सहारा देने वाले भी: यूएई में पाकिस्तानी शियाओं पर संकट


दुबई/अबू धाबी से आई ये ख़बर बड़ी तकलीफ़देह है, साहब। यूएई से हज़ारों की तादाद में पाकिस्तानी शिया बिरादरी के लोगों को जबरन मुल्क से बाहर निकाला गया। सिर्फ़ डिपोर्ट ही नहीं किया गया, बल्कि उनके बैंक अकाउंट्स, जमा पूंजी और सालों की मेहनत से बनाए गए तमाम असासे भी जब्त कर लिए गए।

बताया जा रहा है कि ये क़दम सियासी और फिरकापरस्ती (sectarian) तनाव के चलते उठाया गया है, जहां शिया कम्युनिटी को निशाना बनाया गया। जिन लोगों ने बरसों यूएई में मेहनत-मज़दूरी करके अपनी ज़िंदगी संवरी थी, आज वो सब कुछ गंवाकर खाली हाथ पाकिस्तान लौटने पर मजबूर हैं।

वापसी पर हालात बेहद संगीन नज़र आते हैं। एयरपोर्ट्स और शहरों में मायूस चेहरे, परेशान हाल ख़ानदान, और बेबसी का आलम साफ़ दिखाई देता है। जिनके पास कभी रोज़गार और ठिकाना था, आज वो बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी जूझ रहे हैं।

ये वाक़या एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या पाकिस्तान अपने ही दोस्तों के बीच इज़्ज़त और भरोसा खोता जा रहा है? यूएई जैसे करीबी साथी मुल्क का ये रवैया कई तरह के शक-ओ-शुब्हात को जन्म देता है।

माहिरों का कहना है कि ये सिर्फ़ एक डिपोर्टेशन का मामला नहीं, बल्कि ये इशारा है कि पाकिस्तानी नागरिकों को अब अपने तथाकथित सहयोगी देशों में भी भेदभाव और बेइंसाफ़ी का सामना करना पड़ रहा है।

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