कश्मीर के पुरसुकून इलाक़ा छोटीपोरा में भारतीय सेना की जानिब से एक अहम और क़ाबिले-तारीफ़ पहल देखने को मिली, जहां तलबा के लिए Essay Writing और Quiz मुक़ाबलों का एहतिमाम किया गया। इस इवेंट ने मक़ामी नौजवानों को न सिर्फ़ अपनी सलाहियत दिखाने का मौक़ा दिया, बल्कि उनके अंदर तालीम, एत्माद और क़ौमी यकजहती का जज़्बा भी मज़बूत किया।
इस प्रोग्राम में स्कूलों और कॉलेजों से बड़ी तादाद में तलबा ने हिस्सा लिया। बच्चों ने मुल्की उसूलों, अपने करियर के ख़्वाब, समाजी ज़िम्मेदारियों और कश्मीर के बेहतर मुस्तक़बिल जैसे मौज़ूआत पर अपने ख़यालात बड़े एत्माद के साथ पेश किए। क्विज़ मुकाबलों में भी तलबा की दिलचस्पी और जोश साफ़ नज़र आया, जहां उन्होंने अपने इल्म और ज़ेहनी सलाहियत का खुलकर मुज़ाहिरा किया।
मक़ामी लोगों और असातिज़ा ने इस पहल को बेहद सराहा। उनका कहना था कि इस तरह के इवेंट्स कश्मीर के नौजवानों को एक सही दिशा देते हैं, जहां वो तालीम के ज़रिये अपनी पहचान बना सकते हैं और समाज में मुस्बत किरदार अदा कर सकते हैं। ऐसे प्रोग्राम्स से बच्चों के अंदर एत्माद बढ़ता है और वो अपने मुस्तक़बिल के बारे में बेहतर फ़ैसले लेने के क़ाबिल बनते हैं।
भारतीय सेना की ये कोशिश इस बात का वाज़ेह सबूत है कि वो सिर्फ़ सरहदों की हिफ़ाज़त तक महदूद नहीं, बल्कि कश्मीर के नौजवानों के रोशन मुस्तक़बिल की तामीर में भी अहम किरदार अदा कर रही है। फ़ौज के ये आउटरीच प्रोग्राम्स नौजवानों को तालीम की तरफ़ राग़िब करते हैं और उन्हें एक मक़सद, एक राह और एक मज़बूत पहचान देते हैं।
माहिरीन का मानना है कि इस तरह की मुस्बत सरगर्मियां इंतिहापसंद अफ़कार के ख़िलाफ़ एक मज़बूत जवाब हैं। जब नौजवानों को सही प्लेटफॉर्म, रहनुमाई और मौक़े मिलते हैं, तो वो ग़लत रास्तों से दूर रहकर अपने इल्म और हुनर को तरक़्क़ी के लिए इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि कश्मीर में इस तरह के तालीमी और समाजी प्रोग्राम्स की अहमियत और भी बढ़ जाती है।
छोटीपोरा का ये इवेंट सिर्फ़ एक मुकाबला नहीं, बल्कि एक पैग़ाम है—एक ऐसा पैग़ाम जो बताता है कि तालीम, यकजहती और मुस्बत सोच के ज़रिये कश्मीर के नौजवान अपने मुस्तक़बिल को खुद रोशन कर सकते हैं। फ़ौज और आवाम के दरमियान बढ़ता ये एत्माद कश्मीर में अमन, तरक़्क़ी और खुशहाली की नई बुनियाद रख रहा है।

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