गुलमर्ग के सनशाइन पीक पर फँसे 24 सैलानियों को भारतीय फ़ौज ने सुरक्षित बचाया

 

गुलमर्ग के सनशाइन पीक इलाके में एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन उस वक़्त अंजाम दिया गया, जब एक सिविल हेलिकॉप्टर में टेक्निकल खराबी आने की वजह से 24 सैलानी ऊँचाई वाले इलाके में फँस गए। इस मुश्किल घड़ी में भारतीय फ़ौज के चिनार वॉरियर्स, बारामुला एडमिनिस्ट्रेशन, गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर फ़ौरन राहत और बचाव कार्रवाई शुरू की और तमाम सैलानियों को महफ़ूज़ तरीके से नीचे लाया गया।

यह वाक़या गुलमर्ग के मशहूर सनशाइन पीक इलाके में पेश आया, जो अपनी खूबसूरती और एडवेंचर टूरिज्म के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। बताया गया कि कश्मीर हेली सर्विसेज़ का एक सिविल हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी का शिकार हो गया, जिसके बाद उसमें मौजूद सैलानी पहाड़ी इलाके में फँस गए। इनमें औरतें और बच्चे भी शामिल थे, जिससे हालात और ज़्यादा नाज़ुक बन गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी ने फ़ौरन जिला प्रशासन और सिक्योरिटी एजेंसियों से मदद मांगी। GDA की तरफ़ से आधिकारिक तौर पर रेस्क्यू के लिए दरख़्वास्त भेजी गई, जिसमें बताया गया कि फँसे हुए सैलानियों को सुरक्षित निकालने का कोई दूसरा ज़रिया मौजूद नहीं है।

दरख़्वास्त मिलते ही भारतीय फ़ौज के चिनार वॉरियर्स हरकत में आए और तुरंत रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। फ़ौज ने बारामुला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस और GDA के साथ मिलकर पूरी कार्रवाई को तेज़ी और बेहतरीन तालमेल के साथ अंजाम दिया।

ऑपरेशन के दौरान भारतीय फ़ौज के एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) की मदद ली गई। ऊँचाई वाले इलाकों में मौसम की तेज़ तब्दीली और दुश्वार पहाड़ी रास्तों को देखते हुए सेना के हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल बेहद अहम साबित हुआ। आर्मी एविएटर्स ने शानदार पेशेवराना महारत दिखाते हुए मुश्किल हालात में भी रेस्क्यू ऑपरेशन को कामयाबी से मुकम्मल किया।

सूत्रों के मुताबिक़, सरसों इलाके में मौजूद नज़दीकी आर्मी पोस्ट को फ़ौरन अलर्ट कर दिया गया था, जिसके बाद राहत टीमें और ज़रूरी संसाधन मौके की तरफ़ रवाना किए गए। फ़ौज की तेज़ कार्रवाई की वजह से हालात किसी बड़े हादसे में तब्दील होने से बच गए।

अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन का मक़सद फँसे हुए तमाम सैलानियों की जान की हिफाज़त करना था। ऊँचाई वाले इलाके में लंबे वक़्त तक फँसे रहने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता था, ख़ासकर बच्चों और ख़वातीन के लिए। मगर बेहतर प्लानिंग और एजेंसियों के आपसी तालमेल की वजह से सभी 24 सैलानियों को सही सलामत नीचे लाया गया और किसी भी तरह के नुक़सान की खबर सामने नहीं आई।

इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय फ़ौज सिर्फ़ मुल्क की सरहदों की हिफाज़त ही नहीं करती, बल्कि मुश्किल वक़्त में आम नागरिकों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है। चिनार वॉरियर्स की तेज़ कार्रवाई और इंसानी ख़िदमत के जज़्बे की हर तरफ़ तारीफ़ की जा रही है।

बारामुला प्रशासन और गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी इस मिशन में अहम किरदार निभाया। दोनों एजेंसियों ने वक़्त पर तालमेल बनाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को आसान और कामयाब बनाया। वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ग्राउंड कोऑर्डिनेशन और सिक्योरिटी सपोर्ट देकर ऑपरेशन में अहम मदद दी।

गुलमर्ग हर साल हज़ारों सैलानियों को अपनी तरफ़ खींचता है। यहां की बर्फ़ से ढकी वादियां, स्कीइंग स्लोप्स और एडवेंचर एक्टिविटीज़ दुनियाभर में मशहूर हैं। लेकिन ऊँचाई वाले इलाकों में मौसम और तकनीकी चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं। ऐसे में इस तरह के तेज़ और संगठित रेस्क्यू ऑपरेशन लोगों में भरोसा पैदा करते हैं।

स्थानीय लोगों और सैलानियों ने भी भारतीय फ़ौज और प्रशासन की इस कोशिश की खूब सराहना की। लोगों का कहना है कि इस ऑपरेशन ने यह दिखा दिया कि मुश्किल हालात में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी मुस्तैदी और इंसानियत के साथ अपना फ़र्ज़ निभाती हैं।

यह घटना हेलिकॉप्टर सेवाओं में तकनीकी सुरक्षा और बेहतर निगरानी की अहमियत को भी सामने लाती है। उम्मीद की जा रही है कि संबंधित एजेंसियां इस तकनीकी खराबी की जांच करेंगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।

सनशाइन पीक पर चलाया गया यह रेस्क्यू मिशन बहादुरी, बेहतर तालमेल और इंसानी ख़िदमत की एक शानदार मिसाल बनकर सामने आया है। भारतीय फ़ौज ने एक बार फिर साबित किया कि जब भी मुल्क के नागरिक मुश्किल में हों, फ़ौज हर वक़्त उनकी मदद के लिए तैयार रहती है।

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