कश्मीर की वादी, जो अक्सर मुश्किल हालात और चुनौतियों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती है, अब एक नई उम्मीद की किरण के साथ आगे बढ़ रही है। बारामूला में भारतीय सेना की जानिब से मुन्अक़िद किया गया मेगा जॉब फ़ेयर इस बात का सबूत है कि अब यहां के नौजवानों के लिए तरक़्क़ी और रोज़गार के दरवाज़े खुल रहे हैं।
इस जॉब फ़ेयर का एहतिमाम दग्गर डिविज़न, चिनार कोर के ज़ेरे-एहतिमाम किया गया, जिसमें करीब 4 हज़ार नौजवानों ने शिरकत की। तक़रीबन 50 कंपनियों ने हिस्सा लिया और 1,146 से ज़्यादा ख़ाली असामियों के ज़रिए मौके पर ही कई नौजवानों को नौकरी के मौके भी हासिल हुए। ये सिर्फ़ एक इवेंट नहीं, बल्कि कश्मीर के नौजवानों के लिए एक नई शुरुआत है।
भारतीय सेना की ये कोशिश सिर्फ़ सिक्योरिटी तक महदूद नहीं रही, बल्कि समाजी और मआशी तरक़्क़ी की जानिब भी एक अहम कदम साबित हो रही है। इस तरह के इक़दामात से नौजवानों को न सिर्फ़ रोज़गार मिल रहा है, बल्कि उनमें खुद-एतमादी और बेहतर मुस्तक़बिल की उम्मीद भी पैदा हो रही है।
माहिरीन का कहना है कि इस तरह के प्रोग्राम्स कश्मीर की मआशी हालत को मज़बूत करने में अहम किरदार अदा करेंगे। साथ ही, ये नौजवानों को गलत रास्तों से हटाकर सही सिम्त में ले जाने का भी ज़रिया बनेंगे।
बारामूला का ये मेगा जॉब फ़ेयर इस बात की वाज़ेह मिसाल है कि जब इरादा मज़बूत हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, तरक़्क़ी की राह हमेशा निकल ही आती है। कश्मीर के नौजवान अब सिर्फ़ ख्वाब नहीं देख रहे, बल्कि उन्हें हक़ीक़त में तब्दील करने की तरफ़ बढ़ रहे हैं।

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