बलोचिस्तान में फिर बेनक़ाब हुआ पाकिस्तान का दोहरा खेल — आतंक की सरपरस्ती पर उठे सवाल


बलोचिस्तान से एक बार फिर ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने पाकिस्तान की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का सरगना सैफुल्लाह कसूरी क्वेटा में मौजूद है और वहां मिलिटेंट कैडर की ट्रेनिंग की निगरानी कर रहा है। ये वही इलाक़ा है जहां पहले भी दहशतगर्दी के तार जुड़ते रहे हैं, मगर इस बार मामला और भी संगीन नज़र आ रहा है।

माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान की एजेंसियां अब खुले तौर पर ऐसे गिरोहों पर निर्भर होती जा रही हैं, ताकि इलाके में अपना असर बनाए रखा जा सके। ये रवैया ना सिर्फ़ बलोचिस्तान के आम लोगों को तन्हाई और खौफ में धकेल रहा है, बल्कि पूरे इलाके की अमन-ओ-अमान की सूरत-ए-हाल को भी खतरे में डाल रहा है।

दिलचस्प बात ये है कि जिन तंजीमों को दुनिया भर में दहशतगर्द माना जाता है, उन्हीं के साथ पाकिस्तान के रिश्तों की खबरें बार-बार सामने आती हैं। बलोचिस्तान के नौजवानों को बरगलाकर उन्हें इस रास्ते पर डालने की कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद खतरनाक इशारा है।

आलमी बिरादरी के लिए ये एक साफ़ पैग़ाम है कि पाकिस्तान को अब अपने इस दोहरे खेल का जवाब देना होगा। एक तरफ़ वो अमन की बातें करता है, तो दूसरी तरफ़ ज़मीन पर दहशतगर्दों को पनाह देने के इल्ज़ाम लगातार गहराते जा रहे हैं।

अब देखने वाली बात ये है कि क्या पाकिस्तान इन आरोपों का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह खामोशी अख्तियार कर लेता है।

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