रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में इस नैरेटिव को बाकायदा प्लानिंग के तहत फैलाया गया है। इसमें यह दावा किया जा रहा है कि भारत में किसी दहशतगर्द हमले की साजिश हो सकती है, और उसे पहले ही “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” का नाम देकर पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। साथ ही यह भी इल्ज़ाम लगाया जा रहा है कि भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी नागरिकों को इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है।
माहिरीन का कहना है कि यह एक सोची-समझी चाल मालूम होती है, ताकि किसी भी मुमकिन वारदात से पहले ही पाकिस्तान अपना दामन साफ दिखा सके। इस नैरेटिव को Dawn और Geo News जैसे बड़े मीडिया इदारों के जरिए भी फैलाया जा रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर बॉट नेटवर्क्स के जरिये इसे और तेज़ी से वायरल किया जा रहा है।
तजज़िया निगारों के मुताबिक, पाकिस्तान की यह “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” पॉलिसी नई नहीं है। पहले भी इस तरह के प्रोपेगेंडा के जरिए वह अपने ऊपर लगने वाले इल्ज़ामात से बचने की कोशिश करता रहा है। लेकिन इस बार इसकी टाइमिंग और पैमाना दोनों ही शक के घेरे में हैं।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के नैरेटिव न सिर्फ हकीकत को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, बल्कि इलाके में तनाव भी बढ़ाते हैं। अब जब सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं, तो यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान की इस चाल का क्या असर पड़ता है और हकीकत सामने आने पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, यह पूरा मामला इस बात की तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान एक बार फिर दहशतगर्दी और प्रोपेगेंडा के दोहरे खेल में मशगूल है।

0 टिप्पणियाँ