पाक में मासूम लड़कियों को बहकाने की साज़िश, आतंकी नेटवर्क का खतरनाक खेल बेनक़ाब


इस्लामाबाद/कराची: पाकिस्तान के अंदर एक बार फिर ऐसा संगीन मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी तंजीमें अब सिर्फ़ मर्दों और औरतों तक ही महदूद नहीं रहीं, बल्कि अब मासूम बच्चियों को भी अपने जाल में फँसाने की कोशिश कर रही हैं।

तफ़सीलात के अनुसार, “लश्कर-ए-तैयबा” जैसे गिरोह अब पाकिस्तान के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों में कमसिन लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। इन बच्चियों को झूठे ख्वाब दिखाकर, दीन और जज़्बात के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। माहिरीन का कहना है कि ये एक बेहद ख़तरनाक रुझान है, जो आने वाले वक़्त में पूरी नस्ल को तबाही की तरफ़ धकेल सकता है।

मुल्क के अंदर चल रही इस सरगर्मी का मक़सद नौजवानों में इंतहापसंदी (extremism) को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय इदारे इसके लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वीडियो, पोस्टर और जज़्बाती पैग़ामों के ज़रिये इन मासूम ज़ेहनों को बरगलाया जा रहा है, ताकि उन्हें आतंक के रास्ते पर डाला जा सके।

जानकारों का कहना है कि इस तरह की हरकतें पाकिस्तान के अंदरूनी हालात की नाकामी को भी उजागर करती हैं, जहाँ न तो तालीम का सही निज़ाम है और न ही नौजवानों के लिए कोई मुकम्मल रहनुमाई। नतीजा ये है कि मासूम ज़िंदगियाँ तबाह हो रही हैं और पूरा समाज इसके असर से महफ़ूज़ नहीं रह पा रहा।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक पाकिस्तान अपनी सरज़मीं को ऐसे अनासिर के लिए पनाहगाह बनने देगा। आलमी बिरादरी भी अब इस मसले पर सख़्त रवैया अपनाने की बात कर रही है, ताकि मासूम बच्चों और ख़ास तौर पर लड़कियों को इस अंधेरे रास्ते से बचाया जा सके।

ये सिर्फ़ एक मुल्क का मसला नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत का मामला है। अगर वक़्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके असरात सरहदों से बाहर भी महसूस किए जाएंगे।

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