ईरान में मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे कश्मीरी छात्रों के परिजनों में देशभर में बढ़ती हिंसा और संचार व्यवधानों के बीच गहरी चिंता व्याप्त है। माता-पिता ने द श्रीनगर टाइम्स को बताया कि वे कई दिनों से अपने बच्चों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएँ पैदा हो गई हैं।
श्रीनगर की एक मां ने कहा, “तेहरान के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही मेरी बेटी किस हालत में है, हमें कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने बताया कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट और फोन सेवाएँ बंद प्रतीत हो रही हैं। बारामूला के एक अन्य अभिभावक ने कहा कि ईरान के एक सीमावर्ती ज़िले की मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे उनके 22 वर्षीय बेटे से दो दिनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। कई परिवारों ने बताया कि जब कभी-कभार संपर्क हो भी जाता है, तो बच्चों से केवल अशांति, झड़पों और अनिश्चितता की खबरें ही मिलती हैं।
वर्तमान में ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कश्मीर से लगभग 2,000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। जारी अशांति के कारण तेहरान, इस्फ़हान और मशहद सहित प्रमुख शहरों में हिंसक झड़पों की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शनों के समन्वय को रोकने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं, जिससे कश्मीरी छात्रों सहित अंतरराष्ट्रीय छात्र और अधिक अलग-थलग पड़ गए हैं।
स्थिति से चिंतित परिजनों ने विदेश मंत्रालय (MEA) से हस्तक्षेप की मांग की है। सामूहिक अपील में उन्होंने कहा, “हम विदेश मंत्रालय से अनुरोध करते हैं कि वह तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर हमारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और स्थिति बिगड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाए।”
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) से भी हस्तक्षेप की अपील की गई है। इस महीने की शुरुआत में संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ईरान में फंसे लगभग 3,000 भारतीय छात्रों, जिनमें अधिकांश कश्मीरी हैं, की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
भारत सरकार ने ईरान की गैर-आवश्यक यात्रा से बचने की सलाह जारी की है और कहा है कि भारतीय दूतावास स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए है। हालांकि, अब तक किसी निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है।
गौरतलब है कि जून 2025 में विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंधु के तहत ईरान से 2,000 से अधिक भारतीय छात्रों को विशेष उड़ानों के माध्यम से सुरक्षित वापस लाया था, जब ईरानी हवाई अड्डे बंद थे।
संचार व्यवस्था के लगातार बाधित रहने के बीच कश्मीर के परिवार भय और अनिश्चितता में जी रहे हैं और अधिकारियों से शीघ्र आश्वासन व हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।

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