एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि डॉ. अंद्राबी ने युवाओं से बातचीत की और देश के दुश्मनों द्वारा आतंकवाद के माध्यम से विनाश के प्रयासों और शांति की आवश्यकता पर उनके विचार सुने।
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एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि डॉ. अंद्राबी ने युवाओं के साथ बातचीत की और देश के दुश्मनों द्वारा आतंकवाद के माध्यम से विनाश के प्रयासों और शांति की आवश्यकता पर उनके विचार सुने।
डॉ. अंद्राबी ने कहा कि "सूफियों और ऋषियों की धरती दशकों तक इन आतंकवादियों और उनके अलगाववादी समर्थकों द्वारा रक्तरंजित रही और 2019 के बाद जैसे ही हमने यहाँ शांति देखी, सीमा पार के आतंकी नेटवर्क ने हमारे देश में अपने राजनीतिक और सामाजिक समर्थकों और समर्थकों के साथ मिलकर भय और विनाश फैलाने के लिए अपने असामाजिक और राष्ट्रविरोधी मॉड्यूल को फिर से आकार देना शुरू कर दिया। अंद्राबी ने दिल्ली विस्फोट को जम्मू-कश्मीर की प्रगति को बाधित करने का एक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का उद्देश्य क्षेत्र की शांति और विकास को हिलाना है।"
डॉ. दरख्शां ने कहा, "हमें किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि के ख़िलाफ़ मज़बूती से उठ खड़ा होना होगा और आतंकवाद के ख़िलाफ़ खुलकर बोलना होगा। आतंकवाद हमें तबाह करने की एक चाल है, समावेशिता के ज़रिए शांति हमारी ताक़त है।" उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने में हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस की भूमिका सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी की मज़बूत सरकार हमारे लोगों के ख़िलाफ़ ऐसी चालों का कड़ा जवाब देगी। बाद में मीडिया से बातचीत में एक सवाल के जवाब में अंद्राबी ने कहा कि किसी को भी निर्दोष कश्मीरियों को परेशान करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी और किसी को भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। युवाओं से अपील करते हुए अंद्राबी ने कहा कि हमारे ऋषियों और सूफ़ियों की शांति और समावेशिता की शिक्षाएँ शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अंद्राबी ने कहा, "शांतिपूर्ण माहौल में ही हम अपने युवाओं को बेहतर भविष्य देने का सपना देख सकते हैं।"

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