इसका श्रेय लोगों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जाता है : डिवीजनल कॉम


श्रीनगर : अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), कश्मीर तथा मंडलायुक्त, कश्मीर ने कहा मीरवाइज मौलवी उमर फारूक के नेतृत्व में जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई तथा इसका श्रेय कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अलावा लोगों को भी जाता है।

कड़ी सुरक्षा के बीच मीरवाइज शुक्रवार की नमाज से लगभग एक घंटे पहले जामिया मस्जिद पहुंचे।

जब वह 212 सप्ताह के बाद जुम्मे की नमाज का नेतृत्व करने के लिए लौटे तो हजारों की भावुक भीड़ ने उनका स्वागत किया।

मीरवाइज की नजरबंदी से रिहाई की खबर फैलते ही लोगों ने एकत्र होना शुरू कर दिया था तथा कई सुरक्षा अधिकारी भीड़ पर नजर रख रहे थे।

एडीजीपी कश्मीर विजय कुमार ने न्यूज़ एजेंसियो को बताया की, "यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण था तथा शांति भंग करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।" "लोगों ने पूरा सहयोग दिया और इसका श्रेय कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अलावा लोगो भी जाता है।"

कुमार ने स्वयं शुक्रवार की सामूहिक नमाज कार्यक्रम की निगरानी की तथा एसएसपी श्रीनगर राकेश बलवाल के साथ खानयार के उत्तरी शहर के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में तैनात रहे। शुक्रवार की नमाज समाप्त होने के बाद वे वापिस चले गए।

संभागीय आयुक्त, कश्मीर, विजय कुमार बिधूड़ी ने शुक्रवार की नमाज के शांतिपूर्ण समापन को शांति का लाभांश बताया।

उन्होंने कहा, “विभिन्न हितधारकों द्वारा चीजों की गणना करने के बाद निर्णय लिया गया,” उन्होंने कहा कि इसका श्रेय लोगों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जाता है।

कार्यक्रम को घटना रहित बनाने के लिए जामिया मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था।

मस्जिद के अंदर बड़ी संख्या में नागरिक वर्दी में पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए थे।

जामिया मस्जिद में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की गहन तलाशी ली गई तथा कुछ स्थानों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए।

जामिया मस्जिद के विभिन्न बिंदुओं पर बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को तलाशी में पुलिस की सहायता करते देखा गया।

शांति भंग करने की किसी भी घटना को विफल करने के लिए जामिया मस्जिद के आसपास के इलाके में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात की गईं।