कोकून की खेती ग्रामीण लोगों को विशेष रूप से छोटी और सीमांत भूमि वाले किसानों को आय और रोजगार प्रदान करती है। यह उधमपुर जिले में इससे जुड़े 5000 से अधिक परिवारों के साथ एक सहायक व्यवसाय है जो सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमाते हैं।
कोकून एक छोटी अवधि की नकदी फसल है क्योंकि रेशमकीट का जीवन चक्र 25-30 दिनों की अवधि का होता है। जम्मू और कश्मीर को एक विशेष दर्जा प्राप्त है क्योंकि इसकी जलवायु कोकून उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। गुणवत्ता वाले रेशम के उत्पादन के लिए भारत में बाइवोल्टाइन कोकून की अत्यधिक मांग है।
वर्ष 2021 में उधमपुर जिला केंद्र शासित प्रदेश में कोकून उत्पादन में अग्रणी जिला था। रेशमकीट पालन विभाग ने 5130 किसानों के बीच चॉकी पालन के बाद 5001.5 औंस रेशमकीट बीज वितरित किया।
बंपर फसल रिकॉर्ड करते हुए इस साल जिले ने 155151 किलोग्राम कोकून का उत्पादन किया तथा किसानों ने 4.49 करोड़ रुपये की कमाई की।
शहतूत रेशमकीट एक मोनोफैगस है क्योंकि यह केवल शहतूत के पत्तों पर फ़ीड करता है। शहतूत एक कठोर पौधा है जिसे विभिन्न प्रकार की जलवायु परिस्थितियों में उगाया जा सकता है। रेशमकीटों के पालन के लिए शहतूत के पेड़ों का रोपण बहुत आवश्यक है।
उधमपुर में विभाग के पास शहतूत के पौधों के उत्पादन के लिए 15 शहतूत नर्सरी हैं। विभाग शहतूत के पौधों की उन्नत किस्में किसानों को मुफ्त में और उनके घर पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2020-21 में लगभग 60300 शहतूत के पेड़ किसानों के बीच वितरित किए गए और इस वर्ष किसानों को 76300 पौधे उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग ने तकनीकी माध्यम से किसानों की मदद करते हुए वर्ष 2020-2021 में जिले के विभिन्न अंचलों में 80 पालन उपकरण (किट) वितरित किए। जबकि 2021-22 में, इस योजना के तहत 50 लाभार्थियों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा विभाग किसानों को चावकी के कीट भी वितरित करता है। विभाग के तकनीकी कर्मचारी पालन अवधि के दौरान पालनकर्ताओं को मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।
उन्हें कीटाणुओं के चरण के अनुसार तापमान और आर्द्रता बनाए रखने के लिए कीटाणुशोधक (विभाग द्वारा नि: शुल्क प्रदान) का उपयोग करके पालन कक्ष में उचित स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
रेशम उत्पादन निदेशालय, जम्मू-कश्मीर द्वारा कोकूनों का विपणन आयोजित किया जाता है। बाजार कैलेंडर प्रकाशित किया जाता है और खरीदारों/पालकों को बाजार शुरू होने से पहले ही सूचित कर दिया जाता है। बाजारों में भाग लेने वाले अधिकांश खरीदार पश्चिम-बंगाल, कर्नाटक और कश्मीर, जम्मू और उधमपुर के स्थानीय खरीदार हैं।
कोकून का विपणन एक खुली नीलामी बाजार प्रणाली के माध्यम से किया जाता है और उच्चतम बोली लगाने वाला विक्रेता यानी कोकून उत्पादकों से लॉट खरीदने का हकदार होता है।
बाजार में सभी लेनदेन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से किए जाते हैं। इस वर्ष लगभग 4000 पालकों ने अपने कोकून उधमपुर के नीलामी बाजार में बेचे। इस संबंध में प्रगतिशील पालकों को अपनी फसल बेचकर अच्छी खासी रकम मिलती है। हालांकि यह एक छोटी अवधि की फसल है, बड़े कोकून उत्पादक इसके द्वारा अच्छी कमाई कर लेते है।
इसी प्रकार रेशम उत्पादन विभाग समय-समय पर कोकून उत्पादकों को नवीनतम तकनीकी जानकारी से परिचित कराने के लिए जागरूकता शिविर आयोजित करता है। इसके अलावा, यह केंद्र शासित प्रदेश के में या फिर देश के बाकि हिस्सों में अध्ययन दौरों का भी आयोजन करता है।
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