मीडिया से बातचीत के दौरान जब आईजी लियाकत से पीओजेके में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों की मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी किसी मौत का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाने वालों से कथित मौतों का ठोस सबूत पेश करने को कहा। उनके मुताबिक यदि किसी व्यक्ति की प्रदर्शन के दौरान मौत हुई है तो उसका शव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट या पुलिस रिपोर्ट सामने आनी चाहिए।
आईजी लियाकत का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और कुछ सार्वजनिक हलकों की ओर से सुरक्षा कार्रवाई के दौरान लोगों के मारे जाने के दावे किए गए हैं, जबकि प्रशासन की तरफ से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है। इस तरह मौतों के आंकड़ों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
बातचीत के दौरान जब लियाकत का ध्यान पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता राणा सनाउल्लाह की ओर से बताए गए आंकड़ों की तरफ दिलाया गया, तो उन्होंने इस पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को लेकर सवाल उनसे ही किए जाने चाहिए। इस जवाब ने पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हताहतों को लेकर सरकारी स्तर पर मौजूद अलग-अलग बयानों को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।
गौरतलब है कि आईजी लियाकत पाकिस्तान सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके बयान का पीओजेके में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में खास महत्व माना जा रहा है। हालांकि, उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सार्वजनिक दावों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर मौजूद है।
पीओजेके में समय-समय पर बिजली, महंगाई, करों, प्रशासनिक नीतियों और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। हालिया प्रदर्शनों के दौरान भी स्थानीय आबादी की नाराजगी कई मुद्दों को लेकर सामने आई। ऐसे माहौल में किसी भी कथित नागरिक मौत को लेकर पारदर्शी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड की अहमियत और बढ़ जाती है।
आईजी लियाकत द्वारा शव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट या पुलिस रिकॉर्ड जैसे दस्तावेजी सबूत की मांग किए जाने से यह सवाल भी उठता है कि यदि नागरिक मौतों के दावे किए जा रहे हैं तो उनके समर्थन में आधिकारिक और स्वतंत्र प्रमाण कहां हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से मौतों को पूरी तरह नकारे जाने के बावजूद सार्वजनिक दावों को केवल बयान के आधार पर खारिज करना भी विवाद को खत्म नहीं करता।
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यही है कि पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित नागरिक हताहतों की वास्तविक संख्या को लेकर स्पष्ट और स्वतंत्र जानकारी सामने आए। प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी का निष्पक्ष मिलान ही इस मामले में सच्चाई को सामने ला सकता है।
फिलहाल आईजी लियाकत का बयान पीओजेके में प्रदर्शनों के दौरान नागरिक मौतों को लेकर किए जा रहे दावों और प्रशासन की आधिकारिक स्थिति के बीच मौजूद खाई को उजागर करता है। जब तक संबंधित दावों के समर्थन में ठोस दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग बयानों के बीच असमंजस बना रहना तय है।


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