महिलाओं की शिरकत से पीओजेके के एहतिजाज को मिली नई रफ़्तार, आज़ादी के नारों से गूँजी फ़िज़ा


पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी एहतिजाज अब एक नए मोड़ पर पहुँचते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में सामने आए वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक़, बड़ी तादाद में ख़वातीन और स्कूली छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर आज़ादी के हक़ में नारे बुलंद किए और अपने मुस्तक़बिल के लिए आज़ाद माहौल की माँग की। इन मंजरों को इलाके में बदलते अवामी जज़्बात और पाकिस्तान की हुकूमत के ख़िलाफ़ बढ़ती नाराज़गी के तौर पर देखा जा रहा है।

वीडियो फुटेज में नज़र आता है कि प्रदर्शन में शामिल महिलाएँ और छात्राएँ हाथों में तख़्तियाँ लिए हुए "आज़ादी" और बेहतर मुस्तक़बिल की आवाज़ बुलंद कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पाकिस्तान की नीतियों और प्रशासनिक रवैये के ख़िलाफ़ भी नाराज़गी का इज़हार किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई बरसों से बुनियादी सहूलियतों, रोज़गार, तालीम, सेहत और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम मसलों पर लगातार बेइंतिहा लापरवाही बरती गई है, जिसकी वजह से अवाम में मायूसी बढ़ती गई।

मुताल्लिक़ हलकों का मानना है कि इन एहतिजाजों की सबसे अहम बात महिलाओं और कमसिन छात्राओं की खुली शिरकत है। आम तौर पर ऐसे प्रदर्शनों में पुरुषों की मौजूदगी ज़्यादा रहती थी, लेकिन इस बार महिलाओं और स्कूली लड़कियों का बड़ी तादाद में आगे आना इलाके के सामाजिक और अवामी माहौल में हो रही तब्दीली का इशारा माना जा रहा है। उनके नारों और मांगों ने यह संदेश दिया कि अब समाज का हर तबक़ा अपने हक़ूक़ और बेहतर ज़िंदगी की आवाज़ बुलंद करना चाहता है।

मौक़े पर मौजूद लोगों के मुताबिक़, प्रदर्शन पूरी तरह अवामी मसलों और लोगों की परेशानियों को लेकर केंद्रित रहा। प्रदर्शनकारियों ने बेहतर तालीमी सहूलियतें, रोज़गार के मौक़े, बुनियादी ढाँचे में सुधार और जवाबदेह इंतिज़ामिया की माँग उठाई। कई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे अरसे से उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है, लेकिन अब हालात ऐसे मुकाम पर पहुँच चुके हैं जहाँ ख़ामोश रहना मुमकिन नहीं रहा।

सियासी जानकारों का कहना है कि अगर महिलाओं और नौजवान छात्राओं की भागीदारी इसी तरह बढ़ती रही, तो यह आंदोलन पहले के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा व्यापक शक्ल अख़्तियार कर सकता है। उनका मानना है कि किसी भी अवामी तहरीक़ में महिलाओं की सक्रिय मौजूदगी उसे सामाजिक वैधता और व्यापक समर्थन दिलाने में अहम किरदार अदा करती है। यही वजह है कि हालिया घटनाक्रम को पीओजेके के बदलते सामाजिक और सियासी माहौल के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

इलाके में सोशल मीडिया पर भी इन वीडियो और तस्वीरों को बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा है। कई यूज़र्स का कहना है कि यह प्रदर्शन आम लोगों की बढ़ती बेचैनी और बेहतर हुकूमत की ख़्वाहिश को सामने लाता है। वहीं कुछ स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि अवामी शिकायतों का वक़्त रहते हल नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में ऐसे एहतिजाज और ज़्यादा तेज़ हो सकते हैं।

माहिरों के अनुसार, किसी भी इलाके में तब्दीली की शुरुआत तब होती है जब समाज के अलग-अलग तबक़े एक साझा मक़सद के लिए आगे आते हैं। पीओजेके में महिलाओं और छात्राओं की सक्रिय मौजूदगी इसी बदलते मंजरनामे की एक अहम कड़ी के तौर पर देखी जा रही है। उनका कहना है कि अवाम की उम्मीदें अब केवल बुनियादी सहूलियतों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बेहतर हुकूमत, जवाबदेही और सम्मानजनक मुस्तक़बिल की चाह भी खुलकर सामने आ रही है।

फ़िलहाल इन प्रदर्शनों ने पूरे इलाके में नई बहस छेड़ दी है। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पीओजेके में अवामी जज़्बात पहले की तुलना में कहीं अधिक मुखर हो रहे हैं और समाज के विभिन्न वर्ग अपनी आवाज़ को संगठित ढंग से सामने ला रहे हैं। आने वाले दिनों में इन एहतिजाजों का रुख़ क्या होगा, इस पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ