पाकिस्तानी कार्रवाई पर उठे सवाल, पीओजेके नेता ने दिखाए फायरिंग के सबूत


पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से सामने आई एक नई वीडियो ने एक बार फिर इलाके की बिगड़ती सूरत-ए-हाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के रहनुमा उमर नज़ीर कश्मीरी उन गोलियों के खोखे दिखाते नज़र आते हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि ये हालिया झड़पों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई गोलियों के हैं। उनका कहना है कि रावलाकोट और कोटली में कई हफ़्तों से जारी एहतिजाज के दौरान बेगुनाह लोगों पर सीधी फ़ायरिंग की गई, जिसमें कई नागरिक अपनी जान से हाथ धो बैठे और बड़ी तादाद में लोग ज़ख्मी हुए।

वीडियो में उमर नज़ीर कश्मीरी बड़ी तफ़सील के साथ बताते हैं कि इलाके के लोगों ने अपने बुनियादी हक़ूक़ और इंसाफ़ की मांग को लेकर अमनपसंद तरीके से आवाज़ बुलंद की थी। लेकिन, उनके मुताबिक, जवाब में उन्हें गोलियां और सख़्ती मिली। उन्होंने दावा किया कि ये खाली खोखे इस बात का सबूत हैं कि एहतिजाज को दबाने के लिए ताक़त का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि अब इन निशानियों को छिपाया नहीं जा सकता और दुनिया को यह देखना होगा कि पीओजेके में आम लोगों के साथ क्या सलूक किया जा रहा है।

रावलाकोट और कोटली पिछले कुछ समय से लगातार विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय लोग रोज़गार, महंगाई, बिजली, प्रशासनिक नाइंसाफ़ी और नागरिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं। इन प्रदर्शनों में नौजवानों, बुज़ुर्गों और ख़वातीन की बड़ी तादाद में शिरकत देखने को मिली है। इलाके से आने वाली विभिन्न रिपोर्टों और वीडियो में लोगों के भीतर बढ़ती बेचेनी और नाराज़गी साफ़ महसूस की जा सकती है।

सियासी जानकारों का कहना है कि जब किसी इलाके में लोगों की जायज़ मांगों का जवाब बातचीत के बजाय सख़्ती से दिया जाता है, तो अवाम और हुकूमत के दरमियान भरोसे की खाई और गहरी हो जाती है। उनका मानना है कि पीओजेके में लगातार सामने आ रही घटनाएँ इस बात की तरफ़ इशारा करती हैं कि स्थानीय आबादी अपने हक़ूक़, बेहतर इंतज़ामिया और जवाबदेही की मांग पहले से ज़्यादा मजबूती से उठा रही है।

मुकामी लोगों का कहना है कि हालात इतने संगीन हो चुके हैं कि कई ख़ानदान अपने अज़ीज़ों के लिए इंसाफ़ की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन लोगों की मौत हुई या जो ज़ख्मी हुए, उनके मामलों में पारदर्शी जांच की बजाय खामोशी इख़्तियार की गई। इससे लोगों में ग़ुस्सा और मायूसी दोनों बढ़ी हैं। सोशल मीडिया पर भी इन घटनाओं से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं, जिन पर लोग अपनी फ़िक्र और नाराज़गी का इज़हार कर रहे हैं।

उमर नज़ीर कश्मीरी द्वारा दिखाए गए गोली के खोखे अब सिर्फ़ धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि इलाके में चल रहे तनाव और अवाम के ग़ुस्से की एक प्रतीकात्मक तस्वीर बनकर उभरे हैं। उनका कहना है कि इन सबूतों को महफ़ूज़ रखा जाएगा ताकि आने वाले वक़्त में यह बताया जा सके कि लोगों की आवाज़ को किस तरह दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और इंसानी हक़ूक़ से जुड़ी तंजीमों से भी अपील की कि वे इन घटनाओं का संज्ञान लें और निष्पक्ष जांच की मांग करें।

पीओजेके में लगातार उभर रहे विरोध, नागरिकों की बढ़ती बेचैनी और सामने आ रहे ऐसे वीडियो इस बात का संकेत देते हैं कि वहां हालात सामान्य नहीं हैं। स्थानीय आबादी अपने हक़, इंसाफ़ और सम्मान की मांग पर डटी हुई दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।

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