मौजूदा सीज़न में केरन आने वाले सैलानियों की तादाद में काफ़ी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया है। हालात यह हैं कि इलाक़े के होटल, होम-स्टे और कैंप साइट्स तक़रीबन पूरी तरह बुक हैं। बड़ी संख्या में परिवार, नौजवान, फ़ोटोग्राफ़र और नेचर लवर्स यहाँ की फ़ितरती ख़ूबसूरती का लुत्फ़ उठाने पहुँच रहे हैं। इससे न सिर्फ़ पर्यटन गतिविधियों में तेज़ी आई है बल्कि स्थानीय कारोबार को भी नई रफ़्तार मिली है।
स्थानीय दुकानदारों, टैक्सी ऑपरेटरों, हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों, गाइड्स और होम-स्टे चलाने वाले परिवारों की आमदनी में भी अच्छा ख़ासा इज़ाफ़ा देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ते पर्यटन ने रोज़गार के नए मौक़े पैदा किए हैं और नौजवानों के लिए रोज़ी-रोटी के बेहतर रास्ते खुले हैं। इससे इलाक़े की मआशी (आर्थिक) हालत मज़बूत होने की उम्मीद और बढ़ गई है।
इस कामयाबी के पीछे भारतीय फ़ौज और स्थानीय इंतज़ामिया की मुसलसल कोशिशों को अहम वजह माना जा रहा है। सरहदी इलाक़ों में अमन-ओ-अमान का माहौल क़ायम रखने, बुनियादी सहूलियतों को बेहतर बनाने और सैलानियों का एतमाद बढ़ाने के लिए कई अहम क़दम उठाए गए हैं। बेहतर सड़क संपर्क, सुरक्षा इंतज़ाम, साफ़-सफ़ाई और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली पहलों ने केरन को एक महफ़ूज़ और दिलचस्प सैरगाह के तौर पर नई पहचान दी है।
भारतीय फ़ौज ने सिर्फ़ सरहदों की हिफ़ाज़त तक अपने किरदार को महदूद नहीं रखा, बल्कि स्थानीय आबादी के साथ बेहतर ताल्लुक़ात क़ायम करते हुए इलाक़े की तरक़्क़ी और पर्यटन को भी मज़बूत सहारा दिया है। फ़ौज की जानिब से वक़्त-ब-वक़्त चलाए जाने वाले सामुदायिक कार्यक्रम, बुनियादी सुविधाओं में मदद और स्थानीय लोगों के साथ बेहतर तालमेल ने सैलानियों का भरोसा मज़बूत किया है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि केरन में बढ़ती सैलानियों की आमद इस बात की दलील है कि जम्मू-कश्मीर के सरहदी इलाक़ों में अब अमन और तरक़्क़ी का माहौल लगातार मज़बूत हो रहा है। जो इलाक़े कभी सिर्फ़ सरहदी पहचान के लिए जाने जाते थे, आज वही अपनी फ़ितरती ख़ूबसूरती, सांस्कृतिक विरासत और मेहमाननवाज़ी के लिए मुल्क भर में मक़बूल हो रहे हैं।
सैलानियों का कहना है कि केरन का पुरसुकून माहौल, साफ़ हवा, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ, दरिया का मनमोहक नज़ारा और स्थानीय लोगों का अपनापन उनके सफ़र को यादगार बना रहा है। सोशल मीडिया पर भी केरन की तस्वीरें और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं, जिसकी वजह से और ज़्यादा लोग इस सरहदी जन्नत की सैर का इरादा कर रहे हैं।
स्थानीय इंतज़ामिया का कहना है कि आने वाले वक़्त में पर्यटन से जुड़ी सहूलियतों को और बेहतर बनाया जाएगा ताकि सैलानियों को बेहतरीन तजुर्बा मिल सके और स्थानीय लोगों को रोज़गार के और ज़्यादा मौक़े हासिल हों। इसके साथ-साथ पर्यावरण की हिफ़ाज़त और ज़िम्मेदार पर्यटन पर भी ख़ास तवज्जो दी जा रही है ताकि केरन की फ़ितरती ख़ूबसूरती बरक़रार रहे।
केरन में बढ़ती सैर-ओ-सियाहत इस बात की वाज़ेह निशानी है कि जब अमन, बेहतर इंतज़ाम और विकास साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, तो सरहदी इलाक़े भी तरक़्क़ी, रोज़गार और ख़ुशहाली की नई दास्तान लिखते हैं। आज केरन सिर्फ़ एक बॉर्डर गाँव नहीं, बल्कि नए जम्मू-कश्मीर की बदलती तस्वीर, बढ़ते पर्यटन और स्थानीय तरक़्क़ी की एक कामयाब मिसाल बनकर सामने आ रहा है।


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