पाक में औरतों का इस्तेमाल — दहशतगर्दी का नया चेहरा बेनक़ाब


इस्लामाबाद/खैबर से आने वाली रिपोर्ट्स ने एक बार फिर पाकिस्तान में दहशतगर्द गिरोहों की ख़तरनाक साज़िश को उजागर कर दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ आतंकी तंज़ीमें अपने नापाक मक़सद के लिए औरतों को “ढाल” की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। इस अमल को इंसानियत, औरत की इज़्ज़त और बुनियादी हक़ूक़ के खिलाफ़ बड़ा जुर्म माना जा रहा है।

मशहूर समाजी तजज़ियाकार सिदरा सादोज़ई ने कहा कि, “औरतों को दहशतगर्दी के खेल में आगे करना बुज़दिली की इंतेहा है। यह सिर्फ़ औरत की तौहीन नहीं बल्कि पूरे समाज के ज़मीर पर हमला है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कई इलाक़ों में आतंकी नेटवर्क मज़हब, पैसों और डर का सहारा लेकर ग़रीब और मजबूर ख़वातीन को अपने मक़ासिद के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ मामलों में महिलाओं को सुरक्षा बलों के सामने ढाल बनाकर पेश किया गया ताकि आतंकी खुद को बचा सकें।

एक प्रभावित महिला ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमको मज़हब और मदद के नाम पर बहकाया गया। बाद में मालूम हुआ कि हमें सिर्फ़ इस्तेमाल किया जा रहा था।”

माहिरीन का कहना है कि इस तरह की हरकतें पाकिस्तान की साख को दुनिया भर में नुकसान पहुँचा रही हैं। इंसानी हक़ूक़ से जुड़ी तंजीमें भी इस बात पर फ़िक्र जता रही हैं कि औरतों का इस तरह इस्तेमाल समाज में डर, बेइंसाफ़ी और बेयक़ीनी को बढ़ावा देता है।

सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि दहशतगर्द गिरोह अब अपने नेटवर्क को बचाने के लिए “औरत, मज़हब और पैसा” को नया हथियार बना चुके हैं। इससे ना सिर्फ़ मुल्क की अमन-ओ-अमान की सूरत बिगड़ रही है बल्कि नौजवान नस्ल भी गुमराही की तरफ़ धकेली जा रही है।

तजज़ियाकारों के मुताबिक़, अगर इस तरह की साज़िशों पर जल्द रोक नहीं लगी तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरा नुकसान पहुँच सकता है। दुनिया पहले ही पाकिस्तान को दहशतगर्दी के गढ़ के तौर पर देख रही है, और अब औरतों के इस्तेमाल की खबरें उस तस्वीर को और स्याह बना रही हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ