तालमेल ही सशस्त्र बलों की ताकत है, ऑपरेशन सिंदूर इसका उपयुक्त उदाहरण है: जनरल द्विवेदी

वह मुंबई में माहे श्रेणी के पहले पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जलयान आईएनएस माहे के जलावतरण के अवसर पर बोल रहे थे।


मुंबई, 24 नवंबर: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है और ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उपयुक्त उदाहरण है।

वह मुम्बई में माहे श्रेणी के प्रथम पनडुब्बी रोधी उथले जल पोत आईएनएस माहे के जलावतरण के अवसर पर बोल रहे थे।

जल, थल और आकाश राष्ट्रीय सुरक्षा का एक ही सार हैं और थल सेना, नौसेना और वायु सेना मिलकर भारत की सामरिक शक्ति की त्रिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि बहु-क्षेत्रीय अभियानों के युग में, समुद्र की गहराइयों से लेकर सर्वोच्च सीमा तक एक साथ मिलकर कार्य करने की देश की क्षमता ही भारतीय गणराज्य के सुरक्षा प्रभाव का निर्धारण करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लद्दाख से लेकर हिंद महासागर तक, सूचना युद्ध से लेकर संयुक्त रसद तक, हर क्षेत्र में सक्रिय हैं।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर इसका (सशस्त्र बलों के तालमेल का) एक उपयुक्त उदाहरण था।’’

अप्रैल में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने परिवर्तन की समग्र छतरी के नीचे पहलों की एक श्रृंखला शुरू की है जिसमें संयुक्तता और एकीकरण महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, यह मानते हुए कि आधुनिक संघर्ष बहु-क्षेत्रीय, मिश्रित होंगे और इसके लिए एकजुट राष्ट्रीय शक्ति की आवश्यकता होगी।

एक अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार था कि किसी नौसेना जहाज के जलावतरण के अवसर पर कोई सेना प्रमुख मौजूद था।

अधिकारी ने बताया कि आईएनएस माहे के जलावतरण के बाद जनरल द्विवेदी ने इस पोत के जलावतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नौसेना कर्मियों को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। यह एक दुर्लभ उपलब्धि है, जो आने वाले दिनों में और अधिक देखने को मिलेगी, क्योंकि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल का स्तर बढ़ रहा है।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय नौसेना पड़ोस के साथ-साथ दूर-दराज के देशों में वैश्विक परिवेश में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहां सेना के प्रयास नरम और कठोर कूटनीति में पूरक और पूरक दोनों भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इसे स्मार्ट कूटनीति बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और भारतीय नौसेना हमेशा विश्व भर में एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) मिशनों या यहां तक ​​कि जल-थल अभियानों के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है।

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