उद्घाटन समारोह में कर्नल (सेवानिवृत्त) महान सिंह, डीडीसी अध्यक्ष कठुआ और विधायक ठाकुर दर्शन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपराज्यपाल ने बसोहली उत्सव को कला, संस्कृति और परंपरा का महाकुंभ करार देते हुए कहा कि यह समाज के सभी वर्गों को भारत की महान विरासत का स्मरण कराता है और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ विकसित भारत की यात्रा में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है। उपराज्यपाल ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति के साथ-साथ उसकी कला, संस्कृति और परंपराएँ वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रही हैं, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती मिल रही है।
बसोहली उत्सव को स्थानीय हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध चित्रकला को वैश्विक मंच प्रदान करने वाला अवसर बताते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि बसोहली केवल भौगोलिक बिंदु नहीं, बल्कि कला, साहित्य और परंपरा का जीवंत केंद्र है।
उन्होंने सरकार की ओर से कलाकारों की समृद्धि और बसोहली चित्रकला को देश-विदेश में बढ़ावा देने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। साथ ही युवाओं से बसोहली उत्सव के दौरान रामायण पर आयोजित संगोष्ठी और कार्यशाला में भाग लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में पाँच पुस्तकों—‘लोक में राम’, ‘रामायण की स्त्री गाथा’, ‘राम का घर, ‘राम की संजीवनी’ और ‘रामायण की जनजातियाँ’ का लोकार्पण भी किया गया, जिनमें भगवान राम के सांस्कृतिक लोकाचार, आदिवासी परंपराओं और महिला दृष्टिकोण सहित महाकाव्य के विविध पहलुओं को समाहित किया गया है।
बताया गया कि बसोहली उत्सव अब हर वर्ष आयोजित होगा और यह संस्कृति विभाग के वार्षिक कैलेंडर का हिस्सा रहेगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अटल डुल्लू, संस्कृति सचिव बृज मोहन शर्मा, संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार, पुलिस महानिरीक्षक जम्मू भीम सेन टूटी, एसीबी निदेशक शक्ति कुमार पाठक, कठुआ उपायुक्त राजेश शर्मा, आईजीएनसीए की क्षेत्रीय निदेशक श्रुति अवस्थी, जेकेएएसीएल की सचिव हरविंदर कौर सहित वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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