मैराथन का मुख्य उद्देश्य 1948 के युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान तिथवाल वॉर मेमोरियल पर विशेष पुष्पचक्र अर्पण समारोह भी आयोजित किया गया, जहाँ सेना के अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को याद किया। माहौल बेहद भावुक और गर्व से भरा हुआ दिखाई दिया।
कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने “नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की शपथ भी ली। स्थानीय छात्रों ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं और उन्हें देशभक्ति, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार के कार्यक्रम केवल खेल गतिविधियाँ नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बनते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारतीय सेना लगातार खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक अभियानों के जरिए घाटी में सकारात्मक माहौल तैयार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में बढ़ती युवा भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अब विकास, खेल और सामाजिक सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के खिलाफ सेना द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान युवाओं के बीच खासा प्रभाव छोड़ रहे हैं।
Indian Army के अधिकारियों ने कहा कि तिथवाल दिवस केवल ऐतिहासिक जीत की याद नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, बलिदान और समाज सेवा की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। उन्होंने युवाओं से खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने की अपील की।
मैराथन के दौरान पूरे रास्ते स्थानीय लोगों ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और शहीदों के सम्मान में तालियाँ बजाईं। कई परिवार अपने बच्चों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे पूरे इलाके में एकता और सामुदायिक सहभागिता का माहौल देखने को मिला।
तिथवाल की वादियों में गूंजते देशभक्ति के नारों और युवाओं के जोश ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कश्मीर का युवा अब अमन, विकास और राष्ट्र निर्माण की राह पर आगे बढ़ रहा है। यह मैराथन केवल दौड़ नहीं बल्कि “एक भारत, नशा मुक्त भारत और मजबूत कश्मीर” की भावना का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई।

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