सुबह से ही वाची और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएँ और जरूरतमंद मरीज मेडिकल शिविर में पहुंचे। सेना के डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ ने मरीजों की विस्तार से जांच की और उन्हें मुफ्त परामर्श तथा इलाज संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई। कई बुजुर्ग मरीजों ने बताया कि दूरदराज़ इलाकों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं, ऐसे में सेना की यह पहल उनके लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घाटी के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में आंखों की बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन आर्थिक परेशानियों और अस्पतालों तक सीमित पहुंच के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते। ऐसे हालात में भारतीय सेना द्वारा आयोजित यह शिविर केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवीय सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बनकर सामने आया है।
मेडिकल अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान जिन मरीजों में मोतियाबिंद की गंभीर समस्या पाई गई, उन्हें आगामी सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया है। सेना की ओर से मरीजों को इलाज की पूरी प्रक्रिया में सहायता देने का भरोसा भी दिलाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते इलाज मिलने से कई लोगों की रोशनी बचाई जा सकती है और उनका सामान्य जीवन फिर से बहाल हो सकता है।
इलाके के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने भारतीय सेना की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों के बीच भरोसा मजबूत होता है। उनका कहना है कि सेना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य, शिक्षा और राहत कार्यों के जरिए समाज की मदद भी कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे नागरिक सहायता कार्यक्रमों ने दूरदराज़ इलाकों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य आपात स्थितियों और सामाजिक जरूरतों के समय सेना की सक्रिय भूमिका ने स्थानीय समुदायों के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित किया है। वाची का यह चिकित्सा शिविर भी उसी व्यापक मानवीय दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।
स्थानीय बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि “जब कोई हमारी तकलीफ सुनने वाला नहीं होता, तब सेना हमारे बीच पहुंचती है।” कई मरीजों ने डॉक्टरों और सेना के जवानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार इतनी व्यवस्थित चिकित्सा सुविधा अपने इलाके में मिली है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की स्वास्थ्य सेवाएँ केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि समाज में विश्वास, सहयोग और सकारात्मक सहभागिता को भी बढ़ावा देती हैं। इससे स्थानीय आबादी और सुरक्षा बलों के बीच दूरी कम होती है और सामुदायिक एकता मजबूत होती है।
दक्षिण कश्मीर के वाची में आयोजित यह मोतियाबिंद जांच शिविर एक बार फिर यह दर्शाता है कि Indian Army केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रही, बल्कि मुश्किल हालात में लोगों के लिए जीवनरेखा बनकर भी उभर रही है।

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