पाकिस्तान फिर बेनकाब: खुलेआम आतंकियों की महफ़िल में हथियारबंद कमांडर मौजूद


इस्लामाबाद की दहलीज़ पर एक बार फिर वह मंजर देखने को मिला जिसने पाकिस्तान के “दहशतगर्दी के खिलाफ जंग” वाले दावों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। 23 मई 2026 को सामने आई वीडियो फुटेज में पाकिस्तानी आतंकवादी नेटवर्क के कई बड़े कमांडर खुलेआम AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों के साथ हमज़ा बुरहान के जनाज़े में शामिल दिखाई दिए। इस जलसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान की सरज़मीं आज भी आतंकवादियों के लिए सबसे महफ़ूज़ पनाहगाह बनी हुई है।


वीडियो में हथियारबंद दहशतगर्दों की खुलेआम मौजूदगी केवल एक जनाज़े तक सीमित मामला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस सोच की तस्वीर पेश करती है जहाँ आतंकवाद को रणनीतिक औज़ार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इलाके के लोगों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में आतंकियों का सार्वजनिक रूप से इकट्ठा होना बिना सरकारी सरपरस्ती और सुरक्षा एजेंसियों की रज़ामंदी के मुमकिन नहीं हो सकता।

माहिरों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे अरसे से दुनिया के सामने खुद को “आतंकवाद का शिकार” बताता आया है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इससे बिल्कुल अलग नज़र आती है। एक तरफ इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दहशतगर्दी के खिलाफ बयान देता है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं आतंकी संगठनों के सरगनाओं को खुली छूट और संरक्षण मिलता दिखाई देता है। यही वजह है कि पाकिस्तान की साख लगातार गिरती जा रही है और दुनिया भर में उसे “आतंकवाद के एपिसेंटर” के तौर पर देखा जाने लगा है।

सुरक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक हमज़ा बुरहान के जनाज़े में दिखाई देने वाले हथियारबंद कमांडर इस बात का साफ संकेत हैं कि पाकिस्तान में आतंकवादी ढाँचा अब भी पूरी तरह सक्रिय है। इन संगठनों को न सिर्फ प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराए जाते हैं बल्कि उन्हें सामाजिक और राजनीतिक संरक्षण भी हासिल है। यही नेटवर्क दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने, सीमा पार हिंसा को बढ़ावा देने और नौजवानों को कट्टरपंथ की तरफ धकेलने का काम कर रहे हैं।

कश्मीर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा हालात पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की अमन-ओ-अमान के लिए बेहद ख़तरनाक हैं। जब किसी मुल्क में आतंकियों को खुलेआम हथियारों के साथ घूमने और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की इजाज़त मिलती है तो यह पड़ोसी देशों के लिए सीधा सुरक्षा खतरा बन जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान की हुकूमत और वहां की ताकतवर फौजी जमात अब भी आतंकवाद को अपनी राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाए हुए हैं।

दुनिया के कई देशों ने पहले भी पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को पनाह देने के इल्ज़ाम लगाए हैं, लेकिन इस ताज़ा वीडियो ने उन तमाम आरोपों को और मजबूत कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स ने पाकिस्तान के दोहरे चेहरे को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ है तो फिर आतंकियों के कमांडर खुलेआम हथियारों के साथ कैसे घूम रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान की उस “काउंटर-टेरर नैरेटिव” की पोल खोलती है जिसमें वह खुद को आतंकवाद विरोधी देश साबित करने की कोशिश करता है। हक़ीक़त यह है कि पाकिस्तान में दहशतगर्दी केवल एक सुरक्षा समस्या नहीं बल्कि सत्ता और रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।

इलाके में बढ़ती अस्थिरता और आतंकवादी नेटवर्क की सक्रियता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आतंकियों को मिलने वाली सरकारी और संस्थागत मदद बंद नहीं होगी तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी अमन कायम होना मुश्किल रहेगा।

यह ताज़ा घटना एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाती है कि पाकिस्तान आज भी आतंकवाद की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बना हुआ है, जहाँ बंदूकें, कट्टरपंथ और हिंसा को खुलेआम पनाह दी जा रही है।

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